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कौन हैं USAID की वीना रेड्डी, चुनाव में भारत को फंडिंग मामले में ट्रंप के दावे के बाद सुर्खियों में आईं, भाजपा ने उठाए सवाल

Who is USAID India chief Veena Reddy : वीना रेड्डी अमेरिकी राजनयिक हैं। इनका जन्म आंध्र प्रदेश में हुआ था। वीना पांच अगस्त 2021 को भारत के यूएसएड कार्यालय का प्रमुख बनीं। पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद वह वापस अमेरिका लौट गईं। रेड्डी अमेरिकी विदेश विभाग में भी काम कर चुकी हैं। इससे पहले वह न्यूयॉर्क, लंदन और लॉस एजेंलिस में कॉरपोरेट अटॉर्नी रह चुकी हैं।

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यूएसएड भारत की पूर्व प्रमुख रह चुकी हैं वीना रेड्डी।

Who is USAID India chief Veena Reddy : भारत के लोकसभा चुनाव में वोटरों की संख्या बढ़ाने के लिए USAID की 21 मिलियन डॉलर की फंडिंग पर राजनीतिक बवाल मच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि यह फंडिंग एक खास राजनीतिक दल को चुनाव हराने के लिए हुई। इस पूरे मामले में USAID भारत की पूर्व प्रमुख वीना रेड्डी की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। ट्रंप के इस दावे के बाद भाजपा हमलावर है जबकि कांग्रेस ने सरकार से श्वेत पत्र लाने की मांग की है। भाजपा ने कांग्रेस पर चुनाव में विदेशी दखल रखने का आरोप लगा रही है तो कांग्रेस का कहना है कि यूएसएड से अब तक सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं को अब तक जो फंडिंग मिली है, उस पर सरकार को श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। इस पूरे मामले में यूएसएड की पूर्व भारतीय प्रमुख वीना रेड्डी सवालों के घेरे में आई हैं।

कौन हैं वीना रेड्डी

वीना रेड्डी अमेरिकी राजनयिक हैं। इनका जन्म आंध्र प्रदेश में हुआ था। वीना पांच अगस्त 2021 को भारत के यूएसएड कार्यालय का प्रमुख बनीं। पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद वह वापस अमेरिका लौट गईं। रेड्डी अमेरिकी विदेश विभाग में भी काम कर चुकी हैं। इससे पहले वह न्यूयॉर्क, लंदन और लॉस एजेंलिस में कॉरपोरेट अटॉर्नी रह चुकी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक वीना जब भारत में थी तो यूएसएड की फंडिंग अचानक से बढ़ गई थी। यूएसएड के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 में भारत को 7.7 करोड़ डॉलर की फंडिंग हुई थी जो कि वर्ष 2022 में बढ़कर 28.8 करोड़ डॉलर हो गई। रेड्डी पाकिस्तान के यूएसएड मिशन में भी अपनी सेवा दे चुकी हैं।

हमें भारत सरकार को बताना होगा-ट्रंप

दरअसल, एलन मस्क के नेतृत्व वाले सरकारी दक्षता विभाग (डोज) ने खुलासा किया है कि यूएसएड ने भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग को 2.1 करोड़ डॉलर का योगदान दिया है। इस पर ट्रंप ने कहा कि ‘भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए 2.1 करोड़ डॉलर। हमें भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए 2.1 करोड़ डॉलर खर्च करने की जरूरत क्यों है? वाह, मुझे लगता है कि वे (बाइडन प्रशासन) किसी और को सत्ता में लाने की कोशिश कर रहे थे। हमें भारत सरकार को बताना होगा। भारत में चुनावों के लिए 2.1 करोड़ डॉलर और बांग्लादेश में राजनीतिक परिदृश्य को मजबूत करने के लिए 2.9 करोड़ डॉलर...एशिया अच्छा कर रहा है, हमें उन्हें पैसे देने की जरूरत नहीं है।’

कांग्रेस को मिल रही मदद पर मुहर लगी-प्रसाद

वहीं, यह मामला उजागर होने के बाद भाजपा, कांग्रस पर हमलावर हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को कहा कि राहुल गांधी विदेश जाकर सार्वजनिक तौर पर भारत के लोकतंत्र में विदेशी ताकतों के हस्तक्षेप की मांग करते हैं और आज अमेरिकी राष्ट्रपति ने फंडिंग की पुष्टि कर उनको मिल रही मदद पर मुहर लगा दी है। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विदेशी हस्तक्षेप का यह प्रयास बहुत शर्म की बात है। आज डोनाल्ड ट्रंप के सार्वजनिक बयान से यह स्पष्ट रूप से स्थापित हो गया है कि भारतीय चुनावों में विदेशी मदद के लिए वे इसलिए ‘रोते’ थे क्योंकि उन्हें वोट नहीं मिल रहे थे।

फंडिंग पर श्वेतपत्र लाए सरकार-रमेश

भाजपा के इन आरोपों और दावों का जवाब कांग्रेस ने भी दिया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि ‘यूएसएड’ के संदर्भ में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा किए जा रहे दावे बेतुके हैं। रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘यूएसएड इन दिनों काफी चर्चा में है। इसकी स्थापना तीन नवंबर 1961 को हुई थी। वैसे तो अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा किए जा रहे दावे कम से कम कहने के लिए तो बेतुके हैं। फिर भी, भारत सरकार को जल्द से जल्द एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए, जिसमें दशकों से ‘यूएसएड’ द्वारा सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों को दिए गए सहयोग का विस्तृत विवरण हो।’

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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