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कौन हैं अविनाश पांडे? जिन्हें कांग्रेस ने बनाया यूपी का प्रभारी, लोकसभा चुनाव से पहले क्या है पार्टी की प्लानिंग

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Dec 24, 2023, 07:56 AM IST

Who Is Avinash Pandey: जिस समय मधुसूदन मिस्त्री को यूपी का प्रभारी बनाया गया था तो अविनाश सह प्रभारी की भूमिका में थे। अविनाश यूपी में पहले भी काम कर चुके हैं, ऐसे में वह यहां की राजनीति से भी वाकिफ हैं। यही कारण है कि कांग्रेस ने उन पर बड़ा दांव खेला है।

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अनिवाश पांडे

Photo : Times Now Digital

Who Is Avinash Pandey: लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने कई राज्यों में संगठनात्मक बदलाव किए हैं। प्रियंका गांधी से उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है और उनकी जगह अविनाश पांडे को राज्य का प्रभारी बनाया गया है। इसके अलावा सचिन पायलट को छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी दी गई है। कांग्रेस में हुए इस बड़े बदलाव को लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है और राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि पार्टी का फोकस लोकसभा सीटों के समीकरण साधने में है।

ऐसे में लंबे समय से कांग्रेस में हाशिए पर रहे अनिवाश् पांडे को यूपी में बड़ी जिम्मेदारी मिलने का फैसला चौंकाने वाला है। कहा जा रहा है कि लंबे समय से कांग्रेस में उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण चेहरे को जिम्मेदारी देने की बात चल रही थी। इसी कारण अनिवाश पांडे को आगे किया गया है। अविनाश पांडे के प्रभारी बनने के बाद इस बात के कयास भी लगाए जाने लगे हैं कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिल सकते हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नए प्रभारी अविनाश पांडे को राहुल कैंप का माना जाता है। आइए जानते हैं कौन हैं अविनाश पांडे? कैसा है उनका राजनीतिक सफर? और कांग्रेस ने उन पर क्यों खेला दांव...

कांग्रेस के मूल कैडर से जुड़े, राजनीति का लंबा अनुभव

अनिवाश पांडे कांग्रेस के मूल कैडर से जुड़े हैं और उनकी गिनती पार्टी के पुराने और अनुभवी नेताओं में होती है। राहुल गांधी का कैंप के होने के नाते वे राहुल के करीबी नेता भी माने जाते हैं और जिस समय मधुसूदन मिस्त्री को यूपी का प्रभारी बनाया गया था तो अविनाश सह प्रभारी की भूमिका में थे। मौजूदा समय में वे कांग्रेस वर्किंग कमेट के सदस्य हैं और युवा कांग्रेस के महासचिव भी रहे हैं। 2008 में उन्हें महाराष्ट्र से राज्यसभा प्रत्याशी के तौर पर उतारा गया था, लेकिन वे राहुल बजाज से हार गए थे। हालांकि, 2010 में वे निर्विरोध राज्यसभा गए थे। 2022 में अनिवाश झारखंड प्रभारी रहे हैं।

प्रियंका के लिए बनाई जा रही जगह?

अनिवाश पांडे को राहुल गांधी का करीबी होने के साथ ही प्रियंका गांधी के पसंदीदा नेता के तौर पर भी जाना जाता है। पांडे को यूपी की जिम्मेदारी देने के फैसले के बाद इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि कांग्रेस पार्टी इसके जरिए प्रियंका के लिए पिच तैयार कर रही है। दअरसल, प्रियंका गांधी को 2019 में यूपी का प्रभारी बनाया गया था। उत्तर प्रदेश में वह 2022 तक सक्रिय रहीं। हालांकि, विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने यूपी से दूरी बना ली। अब जब अविनाश पांडे को यूपी कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया है तो इस बात के कयास भी लगने लगे हैं कि उनके प्रभारी रहते प्रियंका रायबरेली और राहुल गांधी अमेठी से चुनाव लड़ सकते हैं।

यूपी के समीकरण साधने में जुटी कांग्रेस

प्रियंका गांधी के प्रभारी बनने के बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस के कई बड़े नेता पार्टी को अलविदा कह चुके हैं। ऐसे में अब अविनाश पांडे के जरिए दोबारा यूपी के राजनीतिक समीकरण साधने की तैयारी है। अजय राज को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के बाद पार्टी ने सूबे में यह दूसरा बड़ा बदलाव किया है। इसके बाद यूपी में बड़े स्तर पर संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। राजनीति गलियारों की चर्चा के मुताबिक, अविनाश की तैनाती ब्राह्मण चेहरे को आगे करने के साथ ही साथ इंडिया गठबंधन में अखिलेश को सहज रखने के लिए भी की गई है। वहीं अविनाश यूपी में पहले भी काम कर चुके हैं, ऐसे में वह यहां की राजनीति से भी वाकिफ हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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