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Atiq Ahmad के आतंक की पूरी कहानी: 100 से ज्यादा मामले, डर ऐसा कि थर-थर कांपते हैं गवाह

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 28, 2023, 12:56 PM IST

माफिया अतीक अहमद पर हत्या, लूट, अपहरण, रंगदारी जैसे 100 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। हालांकि, उमेश पाल का अपहरण ऐसा पहला मामला है, जिसमें अतीक को दोषी पाया गया है।

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माफिया अमीक को लाया जा रहा प्रयागराज

Photo : PTI

Atiq Ahmad News: माफिया अतीक अहमद को गुजरात की साबरमती जेल से प्रयागराज लाने की कहानी जितनी दिलचस्प है, उसकी अपराध की दुनिया के किस्से भी उतने ही खौफनाक हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस ने रविवार को अतीक अहमद के खिलाफ अपना ऑपरेशन शुरू किया था। उसे साबरमती जेल से प्रयागराज लाया गया, जहां उमेश पाल अपहरण के मामले में विशेष अदालत ने अतीक को दोषी ठहराया। यह पहला मामला है, जिसमें अतीक को दोषी पाया गया है। जबकि, उस पर अपराध के अनगिनत मामले दर्ज हैं।

अतीक के अपराध की दुनिया

अतीक के अपराधों की शुरुआत 1979 में हुई थी, जब उस पर एक मामले में हत्या का आरोप लगा था। करीब दस साल बाद 6 नवंबर 1989 में अतीक अहमद पर माफिया चांद बाबा की हत्या का आरोप लगा। इसके बाद माफियाओं की दुनिया में अतीक का नाम ऊपर चढ़ता ही गया। इसी दौरान उसने राजनीति में कदम रखा और उसने निर्दलीय चुनाव जीतकर सबको चौंका दिया। इसके बाद उसे समाजवादी पार्टी से भी टिकट मिला और राजनीतिक शह के चलते अतीक के गुनाह बढ़ते ही चले गए। उसके आतंक का खौफ इतना था कि साल 2012 में 10 जजों ने भी अतीक के खिलाफ एक मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर दिया था। अतीक अहमद का खौफ ऐसा है कि गवाह भी उसके सामने थर-थर कांपते हैं।

अब वो मामला, जिसमें हो सकती है सजा

यह मामला राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल से जुड़ा हुआ है। उमेश का 2006 में अपहरण कर लिया गया था। इसी मामले में 11 आरोपी थे, जिसमें एक की मौत हो चुकी है। इन आरोपियों में अतीक अहमद के अलावा उसका भाई अशरफ भी शामिल था। इन सभी 10 आरोपियों को कोर्ट ने दोषी पाया है। गौरतलब है कि उमेश पाल की बीते महीने फरवरी में हत्या कर दी गई। इस मामले में भी अतीक अहमद को आरोपी बनाया गया है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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