अन्ना हजारे ने कब-कब किया अनशन, क्या थी उनकी मांग, 88 साल के सामाजिक कार्यकर्ता ने फिर भरी 'हुंकार'

Anna Hazare Upcoming Fast: गांधीवादी विचारक एवं समाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे एक बार फिर आंदोलन करने जा रहे हैं। 88 साल के हो चुके अन्ना ने कहा है कि वह 30 जनवरी से अपने गांव रालेगण सिद्धी में आमरण अनशन पर बैठेंगे। दरअसल, महाराष्ट्र में लोकायुक्त की नियुक्ति न होने पर उन्होंने आमरण अनशन शुरू करने का ऐलान किया है। अपने इस एलान के बाद सामाजिक सुधारों और भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल फूंकने वाले अन्ना हजारे एक बार फिर चर्चा में हैं। 2011 में जन लोकपाल विधेयक के लिए दिल्ली के रामलीला मैदान में उनके द्वारा किए गए अनशन को लोग आज भी याद करते हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना लंबे समय से लड़ाई लड़ते आए हैं। यहां हम उनके कुछ प्रमुख अनशनों के बारे में जानेंगे-

Produced by: आलोक कुमार रावUpdated Dec 12 2025, 13:03 IST
​2003 में एनसीपी सरकार के मंत्रियों पर लगाए आरोप​Image Credit : PTI01 / 07

​2003 में एनसीपी सरकार के मंत्रियों पर लगाए आरोप​

2003 में अन्ना हजारे ने कांग्रेस और एनसीपी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। अन्ना ने चार मंत्रियों-सुरेश दादा जैन, नवाब मलिक, विजय कुमार गावित और पद्मसिंह पाटिल के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए भूख हड़ताल पर बैठ गए। हजारे की मांग के आगे झुकते हुए महाराष्ट्र सरकार ने जांच आयोग का गठन किया। नवाब मलिक ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। सुरेश जैन के खिलाफ आरोप तय किए तो उन्होंने भी इस्तीफा दे दिया। (तस्वीर-PTI)

2006: RTI एक्ट के लिए आमरण अनशनImage Credit : PTI02 / 07

2006: RTI एक्ट के लिए आमरण अनशन

सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) में प्रतिकूल संशोधन के विरोध में अलंदी, पुणे में नौ अगस्त से लेकर 19 अगस्त तक आमरण अनशन किया। फिर इनके आंदोलन के आगे झुकते हुए सरकार ने संशोधन में बदलाव करने का वादा किया। (तस्वीर-PTI)

2011 में मुंबई के बीकेसी में अनशनImage Credit : PTI03 / 07

2011 में मुंबई के बीकेसी में अनशन

अन्ना हजारे का बांद्रा कुर्ला कॉम्पलेक्स (BKC), मुंबई में अनशन 27 दिसंबर 2011 को शुरू हुआ था। यह अनशन केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए लोकपाल विधेयक को 'कमजोर' बताकर उसके विरोध में किया गया था। टीम अन्ना ने MMRDA ग्राउंड पर यह आमरण अनशन आयोजित किया, जहां बड़ी संख्या में लोग समर्थन के लिए पहुंचे। हालांकि स्वास्थ्य बिगड़ने और भीड़ अपेक्षा से कम रहने के कारण अन्ना ने अनशन समय से पहले ही समाप्त कर दिया। इसके बाद उन्होंने देशव्यापी आंदोलन और राजनीतिक विकल्प की दिशा में आगे बढ़ने की घोषणा की। (तस्वीर-PTI)

1991 में फूंका भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल​Image Credit : PTI04 / 07

1991 में फूंका भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल​

अन्ना की राष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार के धुर विरोधी सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर पहचान नब्बे के दशक में बनी जब उन्होंने 1991 में 'भ्रष्टाचार विरोधी जनआंदोलन' की शुरूआत की। महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा की सरकार के कुछ 'भ्रष्ट' मंत्रियों को हटाए जाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल की। अन्ना हजारे ने शशिकांत सुतर, महादेव शिवांकर और बबन घोलाप पर आय से ज्यादा संपत्ति रखने का आरोप लगाया था। अन्ना के अनशन के आगे महाराष्ट्र सरकार को झुकना पड़ा और अपने दो मंत्रियों सुतर और शिवांकर को हटाना पड़ा। (तस्वीर-PTI)

​एक दिन हिरासत में रहे अन्ना हजारेImage Credit : PTI05 / 07

​एक दिन हिरासत में रहे अन्ना हजारे

मंत्री घोलाप ने अन्ना के खिलाफ खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया। अपने आरोप साबित करने के लिए अन्ना कोर्ट में सबूत नहीं पेश कर पाए। इस पर उन्हें तीन महीने की जेल हुई। हालांकि तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर जोशी ने उन्हें एक दिन की हिरासत के बाद छोड़ दिया। (तस्वीर-PTI)

​2011 : भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना का दिल्ली में बड़ा आंदोलनImage Credit : PTI06 / 07

​2011 : भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना का दिल्ली में बड़ा आंदोलन

अन्ना हजारे का जनलोकपाल विधेयक अनशन 2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ देश-भर में सबसे बड़ा जनआंदोलन बना। 5 अप्रैल 2011 को उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन शुरू किया, जिसका उद्देश्य सरकार पर एक मजबूत और स्वतंत्र जनलोकपाल लागू करने का दबाव बनाना था। जनता, सामाजिक संगठनों और युवाओं का भारी समर्थन मिला। बढ़ते जनदबाव के बाद सरकार ने जनलोकपाल पर संसद में चर्चा और मसौदा समिति बनाने पर सहमति दी, जिसके बाद अन्ना ने 12 अप्रैल को अनशन समाप्त किया। इस आंदोलन ने देश में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को नई दिशा दी। (तस्वीर-PTI)

जनलोकपाल बिल पर संसद में हुई चर्चाImage Credit : PTI07 / 07

जनलोकपाल बिल पर संसद में हुई चर्चा

लगातार जनदबाव के बीच सरकार ने जनलोकपाल पर संसद में चर्चा कराने, भ्रष्टाचार विरोधी कानून को मजबूत बनाने और आगे के कदम उठाने का वादा किया। यह आंदोलन न केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता की आवाज का प्रतीक बना, बल्कि इसने शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी की दिशा में एक नई जागरूकता पैदा की। इसी आंदोलन से आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ और देश-दुनिया में अरविंद केजरीवाल की पहचान बनी। (तस्वीर-PTI)

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