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क्या है पर्यावरणीय मंजूरियों में 'एक्स पोस्ट फैक्टो', जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए जयराम रमेश

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पर्यावरणीय मंजूरी में 'एक्स पोस्ट फैक्टो' के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जयराम रमेश ने कहा है कि ऐसी मंजूरियां जानबूझकर नियम तोड़ने वालों को आसान रास्ता देती हैं।

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कांग्रेस नेता जयराम रमेश (फाइल फोटो- PTI)

कांग्रेस महासचिव और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट में पर्यावरणीय मंजूरी से सबंधित एक बड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। जयराम रमेश ने पर्यावरणीय मंजूरी में 'एक्स पोस्ट फैक्टो' को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। ‘एक्स पोस्ट फैक्टो’ पर्यावरणीय मंजूरी का मतलब बिना पूर्व अनुमति के शुरू हो चुकी औद्योगिक परियोजनाओं को बाद में वैधानिक मंजूरी देना है।

जयराम रमेश ने खुद दी जानकारी

शुक्रवार को जयराम रमेश ने जानकारी दी कि इस मुद्दे को लेकर उन्होंने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है, जिसमें पिछली तारीख से दी जाने वाली पर्यावरणीय स्वीकृतियों को चुनौती दी गई है। जयराम रमेश का कहना है कि ‘एक्स पोस्ट फैक्टो’ पर्यावरणीय मंज़ूरी का मतलब उन औद्योगिक या विकास परियोजनाओं को बाद में वैधानिक अनुमति देना है, जो बिना किसी पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृति के पहले ही शुरू कर दी गई हों। उनके मुताबिक, यह प्रक्रिया न केवल कानून की भावना के खिलाफ है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की पूरी व्यवस्था को कमजोर करती है।

जयराम रमेश का दावा

उन्होंने साफ शब्दों में दावा किया कि पिछली तारीख से दी जाने वाली पर्यावरणीय मंजूरियां कानून की नजर में गलत हैं, क्योंकि पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन किसी भी परियोजना के शुरू होने से पहले किया जाना अनिवार्य है। रमेश का तर्क है कि ऐसी मंज़ूरियां जन-स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं और शासन व्यवस्था को मजाक बनाकर रख देती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी मंजूरियां जानबूझकर नियम तोड़ने वालों को आसान रास्ता देती हैं। रमेश के मुताबिक, पहले बिना अनुमति के परियोजना शुरू करना और बाद में मंज़ूरी ले लेना एक खतरनाक चलन है, जो कानून का पालन करने वालों के साथ अन्याय करता है। उन्होंने दो टूक कहा कि कानून की अनभिज्ञता, उसका उल्लंघन करने का कोई बहाना नहीं हो सकती।

अरावली मामले में फैसले से मिला है हौसला- रमेश

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि उन्हें अरावली पहाड़ियों की पुनर्परिभाषा से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 29 दिसंबर 2025 को दिए गए आदेश से हौसला मिला है। उन्होंने लिखा कि इसी फैसले की समीक्षा से उत्साहित होकर उन्होंने अब ‘एक्स पोस्ट फैक्टो’ पर्यावरणीय मंजूरियों को चुनौती देने का फैसला किया है।

क्या था अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

गौरतलब है कि इससे पहले 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों और पर्वतमाला की एक समान परिभाषा को लेकर अहम निर्देश दिए थे, जिन्हें बाद में 29 दिसंबर को स्थगित कर दिया गया। जयराम रमेश इसी घटनाक्रम को पर्यावरण संरक्षण के पक्ष में एक सकारात्मक संकेत मानते हुए आगे की कानूनी लड़ाई की तैयारी में हैं।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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