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West Bengal Voter List: 97 साल की महिला से लेकर 12 चुनावों में रहे अधिकारी तक, कई लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कटे

West Bengal Voter List: पश्चिम बंगाल में कई लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का मामला सामने आया है। बुजुर्गों और रिटायर्ड अधिकारियों तक के नाम कटने से लोगों में चिंता बढ़ गई है।

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बंगाल में वोटर लिस्ट से नाम गायब (Photo: PTI)

West Bengal Voter List: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर एक चिंताजनक स्थिति सामने आ रही है। कई ऐसे लोग, जो वर्षों से मतदान करते आ रहे थे, अब खुद को वोटर लिस्ट से बाहर पा रहे हैं। इससे आम लोगों में डर और भ्रम का माहौल बन गया है। कोलकाता (bengal election 2026) की 97 वर्षीय सुबर्णा बाला पोद्दार, जो विभाजन के समय भारत आई थीं, उन्होंने जीवन में कभी वोट देना नहीं छोड़ा। लेकिन इस बार उनका नाम मतदाता सूची में नहीं है। उन्हें इस बात की जानकारी भी नहीं थी। जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अगर स्वास्थ्य ठीक रहा तो वे जरूर वोट देंगी, क्योंकि उनके पास वोटर कार्ड है।

12 चुनावों में पीठासीन अधिकारी रह चुके अशरफुल का भी मतदाता सूची से कटा नाम

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार परिवार के लोगों का कहना है कि उन्होंने आधार, बैंक पासबुक और पेंशन जैसे सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए, फिर भी उनका नाम नहीं जुड़ पाया। एक छोटी सी वर्तनी गलती भी उनके लिए बड़ी परेशानी बन गई। ऐसा ही मामला हुगली जिले में सामने आया है, जहां 72 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक एस. अशरफुल हक का नाम भी मतदाता सूची से हटा दिया गया है। खास बात यह है कि वे 12 चुनावों में पीठासीन अधिकारी रह चुके हैं। उनके पास पासपोर्ट, जमीन के कागजात और अन्य सभी जरूरी दस्तावेज हैं, फिर भी उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया और बाद में नाम हटा दिया गया। उन्होंने इस फैसले के खिलाफ अपील की है।

लोगों को भेजे जा रहे हैं नोटिस

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक नदिया जिले के राणाघाट में एक और दुखद घटना हुई। 68 वर्षीय जीबनकृष्ण बिस्वास अपने और अपनी बेटी के नाम हटने के खिलाफ अपील करने गए थे। लंबी लाइन में इंतजार करते हुए वे अचानक गिर पड़े और उनकी मौत हो गई। परिवार का कहना है कि इस पूरे मामले का तनाव उनकी मौत का कारण बना। कई जिलों से ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि लोगों को बिना स्पष्ट कारण बताए नोटिस भेजे जा रहे हैं और उनके दस्तावेजों को भी पर्याप्त नहीं माना जा रहा। इससे आम लोगों के लिए मतदान का अधिकार एक कठिन प्रक्रिया बनता जा रहा है। यह स्थिति बताती है कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और सरलता बहुत जरूरी है, ताकि किसी भी योग्य नागरिक का अधिकार उससे न छिन जाए।

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मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

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