Mohan Bhagwat New York Speech: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की 'भारत में मुस्लिम नहीं होना चाहिए, ऐसा सोचने वाले हिंदू नहीं' टिप्पणी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भागवत की टिप्पणी संगठन की अलग छवि पेश करने की एक कोशिश है, जबकि आरएसएस के प्रमुख विचारकों ने कथित तौर पर मुसलमानों को 'आंतरिक खतरा' माना था।
न्यूयॉर्क में आयोजित 'वन वर्ल्ड: वन ह्यूमैनिटी' इवेंट को संबोधित करते हुए भागवत ने शनिवार को कहा था कि अगर कोई हिंदू सोचता है कि भारत में कोई मुस्लिम नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदुत्व नहीं है।
'RSS की यह पुरानी रणनीति'
भागवत की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर 7 बिंदुओं वाला जवाब दिया। उन्होंने कहा, ''आरएसएस की यह सबसे पुरानी रणनीति है। उनकी कुछ बातें दुनिया के लिए होती हैं और कुछ सदस्यों के लिए।'' उन्होंने कहा, ''आरएसएस ने आजादी के आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया। आरएसएस के संस्थापक हेडगेवार कांग्रेस में थे, लेकिन उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी, क्योंकि वह गांधी के नेतृत्व में अंग्रेज विरोधी आजादी की लड़ाई में सभी धार्मिक समुदायों के शामिल होने के खिलाफ थे।''
ओवैसी ने कहा कि आरएसएस द्वारा प्रकाशित हेडगेवार की जीवनी (डॉ. हेडगेवार: द युग-निर्माता) में दर्ज है कि वे गांधीजी द्वारा हिंदू-मुस्लिम एकता के नाम पर चलाए जा रहे प्रयासों को खतरे के रूप में देखते थे। असम में, उन्हें हिंदू-मुस्लिम एकता का नया नारा भी पसंद नहीं आया।
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ओवैसी ने आगे कहा, ''आरएसएस लोकतंत्र का विरोध करता है और लगातार तानाशाही की मांग करता रहा है।'' उन्होंने गोलवलकर के 1940 के उस वक्तव्य का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने ''एक ध्वज (भगवा), एक नेता और एक विचारधारा" की बात कही थी। उन्होंने 2002 के गुजरात दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि आरएसएस समर्थित शासन के दौरान अल्पसंख्यकों को भीषण हिंसा, लूटपाट और प्रताड़ना का सामना करना पड़ा और पुलिस मूकदर्शक बनकर खड़ी रही। ओवैसी ने आगे गोलवलकर की किताब 'बंच ऑफ थॉट्स' का भी जिक्र किया।
