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पंजाब पुलिस की गिरफ्त में आया अमृतपाल सिंह, 36 दिनों से था फरार

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 23, 2023, 08:08 AM IST

Amritpal Singh Arrested: जानकारी के मुताबिक, अमृतपाल सिंह ने मोगा पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है। वह 18 मार्च से फरार चल रहा था। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए कई राज्यों में दबिश दे चुकी थी।

Amritpal Singh Arrested: खालिस्तानी नेता और वारिस पंजाब दे का मुखिया अमृतपाल सिंह को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, अमृतपाल को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अमृतपाल सिंह को मोगा के गुरुद्वारा से हिरासत में लिया गया है। पंजाब पुलिस ने अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

अमृतपाल की गिरफ्तारी की खबर तब सामने आई है, जब दो दिन पहले उसकी पत्नी किरणदीप कौर को लंदन जाने से रोका गया था। पुलिस ने उसे अमृतसर एयरपोर्ट से हिरासत में लिया था। यहां पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया था। इसके दो दिन बाद अमृतपाल की गिरफ्तारी की सूचना आई है। बता दें, इससे पहले 15 अप्रैल को पंजाब पुलिस ने उसके करीबी सहयोगी जोगा सिंह को फतेहगढ़ साहिब जिले के सरहिंद से गिरफ्तार किया। एक और करीबी पप्पलप्रीत सिंह को 10 अप्रैल को पंजाब पुलिस और इसकी काउंटर-इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा चलाए गए एक ऑपरेशन में गिरफ्तार किया गया था।

Amritpal Singh Surrendered Before Moga Police

Amritpal Singh Surrendered Before Moga Police

एक दिन पहले ही आ गया था मोगा

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अमृतपाल सिंह एक दिन पहले ही मोगा आ गया था। गिरफ्तारी के बाद उसे असम की डिब्रूगढ़ जेल शिफ्ट किए जाने की तैयारी है। अमृतपाल के अन्य साथियों को भी इसी जेल में रखा गया है। सूत्रों के मुताबिक, उसे स्पेशल फ्लाइट से ले जाया जाएगा। उधर, पंजाब पुलिस ने ट्वीट करके अमृतपाल की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। साथ ही सभी से कानून व्यवस्था बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

36 दिनों से चल रहा था फरार

अमृतपाल सिंह के खिलाफ पंजाब पुलिस ने 18 मार्च को एक्शन शुरू किया था। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए कई जगहों पर दबिश दी थी। हालांकि, अमृतपाल पुलिस की नजरों में धूल झोंकने में कामयाब रहा और फरार हो गया। 19 मार्च को उसके हरियाणा में होने का इनपुट मिला। हालांकि, इसके बाद वह रूप बदलकर फरार हो गया, जिसके बाद पुलिस ने कई राज्यों और नेपाल सीमा तक में उसकी तलाश की। इसके बाद पुलिस ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया।

अमृतपाल पर लगाया गया एनएसए

पंजाब पुलिस ने अमृतपाल के खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज करने के साथ ही उस पर NSA भी लगाया है। पुलिस को अमृतपाल के देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने की जानकारी मिली थी। खुफिया एजेंसियों ने भी अमृतपाल को लेकर अलर्ट जारी किया था। सामने आया था कि उसके पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से भी मदद मिल रही थी और वह युवाओं को देश के खिलाफ भड़काने का काम कर रहा था।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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