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वार्ड फॉर्मूला, फुटबॉल-क्रिकेट...बंगाल में BJP ने कुछ इस तरह लिखी 'विजय श्री' की पटकथा, जानें जीत की इनसाइड स्टोरी

पश्चिम बंगाल में भाजपा ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के पारंपरिक गढ़ों में सेंध लगाई और शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अपना जनाधार बढ़ाया। इस जीत के साथ, भाजपा राज्य में पहली बार सरकार बनाएगी। वर्ष 2011 में लगभग चार प्रतिशत के मामूली वोट शेयर से, भाजपा 2019 में लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच गई।

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बंगाल में 206 सीटों पर विजयी हुई भाजपा।

Photo : PTI

BJP win in Bengal: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 206 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया। इस प्रचंड जीत के साथ ही बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत हो गया। बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 148 है। हालांकि, फाल्टा में मतदान रद्द होने के कारण 293 निर्वाचन क्षेत्रों के मतों की गिनती हुई और इस वजह से फिलहाल बहुमत का आंकड़ा 147 है। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के पारंपरिक गढ़ों में सेंध लगाई और शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अपना जनाधार बढ़ाया। इस जीत के साथ, भाजपा राज्य में पहली बार सरकार बनाएगी।

वर्ष 2011 में लगभग चार प्रतिशत के मामूली वोट शेयर से, भाजपा 2019 में लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच गई और फिर 2021 के विधानसभा चुनावों में 77 सीटें हासिल करके वामपंथी और कांग्रेस को पछाड़ते हुए टीएमसी के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरी। बंगाल में यहां तक पहुंचने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं एवं संगठन की कड़ी मेहनत और बड़े नेताओं का बंगाल की जनता से लगातार संवाद रहा है। बंगाल में सरकार बनाने के लिए भाजपा ने कई स्तरों एवं मोर्चों पर रणनीति बनाकर आगे बढ़ी। यहां हम उसकी चर्चा करेंगे।

सूत्रों के मुताबिक सिर्फ फरवरी महीने में ही बीजेपी ने 1.65 लाख छोटी-छोटी बैठकों के जरिए मतदाताओं तक पहुंच बनाई गई वो भी तब, जब लाउडस्पीकर तक पर पाबंदी थी।

दो साल की तैयारी, 142 वार्ड का फॉर्मूला

कोलकाता प्रेसीडेंसी को 142 वार्डों में बांटकर संगठन को जमीनी ढांचा दिया गया। हर वार्ड में 5 पदाधिकारी—और हर पदाधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई। रणनीति सीधी थी-हर प्रभावशाली व्यक्ति तक पहुंच, हर सोसाइटी में पैठ।

रणनीति की कमान: पर्दे के पीछे की टीम

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष नित्न नवीन के साथ इस पूरे बंगाल अभियान की बागडोर भूपेन्द्र यादव और सुनील बंसल की टीम ने संभाली। कैंपेन के नैरेटिव से लेकर माइक्रो मैनेजमेंट तक, हर स्तर पर बारीकी से काम हुआ।

फुटबॉल और क्रिकेट बना सियासी हथियार

बंगाल में फुटबॉल सिर्फ खेल नहीं, भावना है—और बीजेपी ने इसी भावना को पकड़ा।

'नरेंद्र कप' फुटबॉल टूर्नामेंट के जरिए

  • राज्य में 1123 टीमों के माध्यम से 18 हजार खिलाड़ियों की भागीदारी
  • 1 लाख खिलाड़ियों को जर्सी और टी-शर्ट
  • ⁠80 हजार फुटबॉलों का वितरण खिलाड़ियों में किया गया।
  • दिलचस्प पहलू ये रहा कि महिला फुटबॉल टूर्नामेंट भी अलग से कराया गया जिसमें 253 महिला टीमों की भी सहभागिता रही फ़ुटबॉल टूर्नामेंट में
  • 5000 बैट-बॉल का वितरण किया गया जिसमें बैट पर पीएम मोदी के फोटो लगाये गये थे।
  • यानी खेल के बहाने युवा कनेक्ट किया गया
Ravikant Rai
रविकांत रायauthor

सत्ता के गलियारों से आम जनमानस से जुड़ी हर ख़बर पर पैनी नज़र, । राजनीति के हर दांव पेंच से वाकिफ, 13 सालों में दो लोकसभा चुनाव और कई राज्यों के विधान सभा चुनाव कवर करने का अनुभव। संसद भवन, बीजेपी और प्रधानमंत्री कार्यालय को मैं कवर करता हूं... फिल्मे देखना , सपने देखना और उनका पूरा करने के लिए पूरी ताकत लगा देना ये मेरा जुनून है।

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