श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में रविवार को भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन (C. P. Radhakrishnan) ने राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके (Anura Kumara Dissanayake) से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच भारत और श्रीलंका के रिश्तों को और मजबूत बनाने को लेकर विस्तार से बातचीत हुई। दोनों ने साझा इतिहास और सांस्कृतिक संबंधों को इन रिश्तों की मजबूत नींव बताया। बैठक के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री (Vikram Misri) ने जानकारी दी कि बातचीत में ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। श्रीलंका के राष्ट्रपति ने भारत की “पड़ोसी प्रथम” नीति की सराहना की और कहा कि संकट के समय भारत हमेशा एक भरोसेमंद साथी के रूप में सामने आया है।
संकट के समय भारत श्रीलंका के साथ रहा खड़ा
उन्होंने खास तौर पर साल 2022 के आर्थिक संकट के दौरान भारत की मदद को याद किया। इसके अलावा 2025 में आए चक्रवात के बाद भारत द्वारा राहत सामग्री और पुनर्निर्माण सहायता देने की भी सराहना की गई। इस दौरान भारत ने बड़ी मात्रा में मदद भेजी थी, जिससे श्रीलंका को काफी राहत मिली। बैठक में श्रीलंका को ऊर्जा के क्षेत्र में मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया। इसके लिए भारत के निवेश और कई नई परियोजनाओं पर चर्चा हुई। त्रिंकोमाली को एक बड़े ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर भी विचार किया गया। साथ ही भारत और श्रीलंका के बीच तेल पाइपलाइन जोड़ने के प्रस्ताव पर भी बातचीत हुई, जिससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग और मजबूत हो सकता है।
डिजिटल और भौतिक कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर भी चर्चा
इसके अलावा डिजिटल और भौतिक कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर भी चर्चा हुई, ताकि दोनों देशों के बीच व्यापार और संपर्क आसान हो सके। मौजूदा वैश्विक हालात और ऊर्जा संकट को देखते हुए इन परियोजनाओं को काफी अहम माना जा रहा है। मानवीय मुद्दों पर भी बातचीत हुई, खासकर मछुआरों से जुड़े मामलों पर। हाल ही में श्रीलंका ने 47 भारतीय मछुआरों को रिहा किया है, जिस पर भारत ने आभार जताया। दोनों देशों ने इस मुद्दे को आपसी बातचीत और सहयोग से सुलझाने पर सहमति जताई।
