मनरेगा की जगह लेने वाला बिल लोकसभा में पेश हो गया है। ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को लोकसभा में विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन-ग्रामीण (VB-G RAM G) बिल पेश किया। शिवराज सिंह चौहान जैसे ही बिल को पेश करने के लिए अपनी सीट से उठे, विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष इस बिल का विरोध कर रहा है। खुद प्रियंका गांधी विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन-ग्रामीण (VB-G RAM G) बिल के विरोध में उतरीं और सरकार पर जमकर सवाल उठाए।
बिल को लेकर सरकार ने क्या कहा
सरकार का कहना है कि यह विधेयक विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप एक नया और व्यापक ग्रामीण विकास ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से लाया गया है। बिल के प्रावधानों के अनुसार, हर वित्तीय वर्ष में प्रत्येक ऐसे ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य बिना किसी विशेष कौशल वाले शारीरिक कार्य के लिए स्वेच्छा से तैयार हों, 125 दिनों के रोज़गार की कानूनी गारंटी दी जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय सुरक्षा बढ़ेगी और रोजगार के अवसरों का विस्तार होगा।
विपक्ष का विरोध
लोकसभा में विपक्षी सदस्यों ने ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इसे वापस लिया जाए या फिर संसदीय समिति के पास भेजा जाए। चौहान ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं।’’
चौहान का पलटवार
चौहान का कहना था कि मोदी सरकार महात्मा गांधी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर आधारित कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने सवाल किया, ‘‘कांग्रेस की सरकार ने भी जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला था तो क्या यह पंडित जवाहरलाल नेहरू का अपमान था?’’
चौहान ने कहा कि सरकार ने मनरेगा पर 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने बताया, ‘‘हम इस विधेयक में 125 दिन के रोजगार की गारंटी दे रहे हैं। यह कोई कोरी गारंटी नहीं है, बल्कि 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि का प्रावधान किया गया है।’’ उन्होंने कहा कि इस विधेयक से गांवों का संपूर्ण विकास होगा।
प्रियंका ने खोला मोर्चा
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इससे रोजगार का कानूनी अधिकार कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘विधेयक में केंद्र के अनुदान को 90 से 60 प्रतिशत किया गया है और राज्यों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘विधेयक वापस लिया जाना चाहिए या कम से कम स्थायी समिति के पास भेजा जाए।’’ प्रियंका गांधी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि किसी की ‘‘निजी महत्वाकांक्षा, सनक और पूर्वाग्रह’’ के आधार पर कोई विधेयक पेश नहीं होना चाहिए। कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल और शशि थरूर, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की नेता सुप्रिया सुले और कई अन्य सदस्यों ने भी विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इसे संसदीय समिति के पास भेजा जाए।
