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'400 सीटें मिलती तो भारत में होते 'PoK' और 'अक्साई चिन'...' केंद्रीय मंत्री ने किया बड़ा दावा

Prataprao Jadhav: केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लंबे समय से पीओके को भारत के मानचित्र में शामिल करने का सपना देख रहे हैं। अगर 400 से अधिक सीटें जीत जाते, तो दो-तिहाई बहुमत प्राप्त होता, जिससे ये आकांक्षाएं संभव हो जातीं।

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Union Minister Prataprao Jadhav

Photo : Twitter

Prataprao Jadhav: केंद्रीय मंत्री और शिवसेना सांसद प्रतापराव जाधव ने दावा किया है कि अगर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) लोकसभा चुनाव में 400 से अधिक सीट जीतता तो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को भारत में शामिल करना और 1962 में चीन द्वारा कब्जाई गई भूमि को वापस लेना संभव हो जाता।

अकोला में महायुति गठबंधन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लंबे समय से पीओके को भारत के मानचित्र में शामिल करने का सपना देख रहे हैं। आयुष और लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री ने कहा, पीओके भारत का अभिन्न अंग होने के बावजूद पाकिस्तान के नियंत्रण में है। भारत का लक्ष्य 1962 के युद्ध के दौरान चीन द्वारा कब्जाई गई भूमि को पुनः प्राप्त करना भी है। अगर 400 से अधिक सीटें (हाल के लोकसभा चुनावों में राजग) जीत जाते, तो दो-तिहाई बहुमत प्राप्त होता, जिससे ये आकांक्षाएं संभव हो जातीं।

संविधान में बदलाव का किया गया झूठा प्रचार

बुलढाणा के सांसद प्रतापराव जाधव ने आरोप लगाया कि यह झूठा प्रचार फैलाया गया कि अगर मोदी सत्ता में वापस आए तो संविधान बदल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि संविधान में बदलाव नहीं किया जा सकता और उन्होंने इंदिरा गांधी द्वारा 1975 में लगाए गए आपातकाल को संविधान को पलटने का वास्तविक उदाहरण बताया। बता दें, लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के दलों ने दावा किया था कि अगर चुनाव में एनडीए को 400 सीटें मिलेंगी तो वे संविधान को समाप्त कर देंगे। इसको लेकर काफी हंगामा भी मचा था।

सीएम योगी भी कर चुके हैं PoK लेने का दावा

लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ भी पीओके को भारत में शामिल होने का दावा कर चुके हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंंने एक रैली में कहा था कि अगर एनडीए को 400 सीटें मिलती हैं तो सरकार बनने के 6 महीने के अंदर ही पीओके भारत में शामिल हो जाएगा।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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