गुजरात विधानसभा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस बिल को पेश किया था। राज्य में समान नागरिक कानून लागू करने की दिशा में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है। बिल पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के सात दशकों बाद भी देश में सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करने का विचार आगे नहीं बढ़ पाया, लेकिन अब सरकार इस दिशा में ठोस पहल कर रही है। उन्होंने साफ किया कि राज्य में किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
UCC बिल के तहत विवाह,तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप और उत्तराधिकार जैसे मुद्दों पर एक समान कानूनी ढांचा लागू किया जाएगा।सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य सभी धर्मों और समुदायों के लिए एक समान न्याय व्यवस्था सुनिश्चित करना है। सरकार ने खासतौर पर महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने पर जोर दिया है। बिल में बेटियों को पिता की संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार देने का प्रावधान शामिल किया गया है। इसके अलावा निकाह हलाला जैसी प्रथाओं पर रोक लगाने की भी बात कही गई है।
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी सरकार ने इस बिल में स्पष्ट किया कि इसका रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, न कि उनकी स्वतंत्रता पर अंकुश लगाना। सरकार के मुताबिक यह कदम महिलाओं को धोखे और शोषण से बचाने के लिए उठाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ही संविधान के तहत अलग-अलग कानूनों की व्यवस्था उचित नहीं है, इसलिए UCC के जरिए सभी नागरिकों पर समान नियम लागू किए जाएंगे। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ समुदायों में प्रचलित परंपराओं, जैसे कजिन मैरिज, पर इस कानून के तहत कोई रोक नहीं लगाई जा रही है।
सरकार ने माना कि UCC को लेकर कई तरह की गलतफहमियां हैं, जिन्हें दूर किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य सामाजिक संतुलन बनाए रखना और महिलाओं व बच्चों के अधिकारों को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री ने नवरात्रि के अवसर पर इस बिल को पेश किए जाने को महिलाओं के सम्मान से भी जोड़ा और इसे एक प्रतीकात्मक कदम बताया।
