तृणमूल कांग्रेस उन 20 बागी लोकसभा सांसदों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है जो 'नेशनलिस्ट सिटिन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में शामिल हो गए थे। यह कदम तब उठाया जा रहा है जब स्पीकर के दफ्तर ने बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की पार्टी की शिकायतों पर कोई फैसला नहीं लिया है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) उन 20 बागी लोकसभा सांसदों के मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाली है, जिन्होंने पार्टी छोड़कर 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) का दामन थाम लिया था। सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी सात से 10 दिनों के भीतर उन्हें अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिका दायर कर सकती है।
यह कदम TMC और स्पीकर के ऑफिस के बीच अयोग्य ठहराने की लंबित याचिकाओं को लेकर बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी स्पीकर ओम बिरला के ऑफिस से फैसले के लिए और इंतज़ार नहीं करना चाहती, क्योंकि उसे लगता है कि और देरी से उसके मामले पर असर पड़ सकता है।
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पार्टी के लोकसभा नेता और महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को बिरला से मुलाक़ात की और जल्द फैसले की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर स्पीकर कानून और अदालती निर्देशों के तहत तय समय में कार्रवाई नहीं करते हैं, तो वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। सूत्रों ने यह भी बताया कि पार्टी दल-बदल से जुड़ी शिकायतों पर फैसला लेने के लिए तीन महीने की समय-सीमा और ऐसी याचिकाओं के समय पर निपटारे के बारे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी हवाला दे रही है।
अभिषेक बनर्जी ने क्या कहा
बनर्जी ने कहा कि उन्होंने सबसे पहले जून में बिड़ला के सामने यह मुद्दा उठाया था, जब 20 सांसदों में से हर एक के खिलाफ अयोग्यता की अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं, लेकिन लगभग दो महीने बीत जाने के बाद भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए बनर्जी ने कहा, 'मैंने जून में ही स्पीकर के सामने यह मुद्दा उठाया था, जब उनमें से हर एक के खिलाफ अयोग्यता की अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं। तब से लगभग दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन मुझे अभी तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।'
उन्होंने कहा कि वे अयोग्यता याचिकाओं के समय पर निपटारे के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर भरोसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'अगर स्पीकर कानून और लागू न्यायिक निर्देशों के तहत तय समय-सीमा में इन याचिकाओं पर फैसला नहीं करते हैं, तो मुझे सुप्रीम कोर्ट का रुख करने और उसके दखल की मांग करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।'
