भारत ने हाईटेक मिसाइलें बनाने के मामले में वो ऊंचाइयां छू ली हैं कि दुश्मन देशों के लिए यह डर का कारण बन गई है, भारत ने कई उन्नत मिसाइल प्रणालियों (India's Top High Tech Missile) का विकास किया है और यह देश की सुरक्षा के नजरिए से ना सिर्फ अहम है बल्कि पड़ोसी देशों खासकर पाकिस्तान के लिए डर का बड़ा कारण माना जाता है, भारत के पास छोटी दूरी से लेकर लंबी दूरी तक वार करने वाली मिसाइलें हैं।
अग्नि-V (Agni-V) मिसाइल भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित एक भूमि आधारित परमाणु MIRV-सक्षम अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है। इस मिसाइल की मारक क्षमता 7,000 किलोमीटर से अधिक है इसका नाम सुनकर दुश्मन को पसीना आता है, यह दुनिया की सबसे तेज मिसाइलों में से एक है।
कई टारगेट पर हमला करने की क्षमता इसे अद्धितीय बनाती है और ये न्यूक्लियर हथियार ले जाने में सक्षम है यानी 'कैनीस्टराइज़्ड लॉन्च' टेक्नोलॉजी से लैस है, इसकी खासियत परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता और सटीक निशाना इसे खास बनाती है, बताया जाता है कि यह पाकिस्तान के किसी भी शहर को बस कुछ ही मिनट में नष्ट करने में सक्षम है।
नाग मिसाइल (Nag Missile) एक फायर एंड फॉरगेट एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है, बताते हैं कि एक बार लॉन्च होने के बाद यह खुद लक्ष्य को पहचान कर उसे खत्म कर देती है नाग मिसाइल थर्मल इमेजिंग सीकर का इस्तेमाल करती है, जिससे यह दिन-रात के साथ विपरीत मौसम में भी इस्तेमाल की जा सकती है।
शौर्य एक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल (Shaurya Missile) है, जो जमीन से जमीन पर पारंपरिक ही नहीं बल्कि परमाणु हमला भी कर सकती है इस मिसाइल की खास बात यह है कि बहुत कम ऊंचाई पर उड़ने की वजह से यह दुश्मन के रडार को चकमा देते हुए सटीक हमला कर पाने में सक्षम है, इसकी रफ्तार मैक 7.5 है यानी आवाज से साढ़े सात गुना तेज है।
ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (BrahMos Supersonic Cruise Missile) है और ये आवाज की रफ्तार से तीन गुना तेज चलती है इसमें पारंपरिक और परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता है और यह जमीन, समुद्र और आसमान तीनों ही जगह से लॉन्च करने में सक्षम है।
अस्त्र मिसाइल (Astra Missile) भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित सभी मौसम से परे दृश्य-सीमा वाली हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल का एक भारतीय परिवार है, अस्त्र को एमके-1 को सुखोई एसयू-30एमकेआई बेड़े के साथ एकीकृत किया गया है।