कल से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने परिसीमन और विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) से जुड़े प्रस्तावित विधेयकों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए जरूरी है।
ओ ब्रायन ने अपने पत्र में कहा कि भले ही संसद के मानसून सत्र की कार्यसूची में फिलहाल परिसीमन से संबंधित कोई विधेयक शामिल नहीं है, लेकिन सरकार के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए विपक्ष में आशंकाएं बनी हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी कुछ अहम विधेयकों को सीमित चर्चा के साथ पेश किया गया था।
उन्होंने साल 2019 के जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी कार्यसूची की पूरक सूची जारी होने से पहले विधेयक सदन में पेश किया गया था। ओ ब्रायन ने सरकार से आग्रह किया कि परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर इस तरह की प्रक्रिया न अपनाई जाए।
टीएमसी सांसद ने लोकसभा में 16 अप्रैल को पेश संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक और परिसीमन विधेयक का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि ये विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सके और बाद में इन्हें आगे नहीं बढ़ाया गया।
इसके साथ ही टीएमसी सांसद ने अपने पत्र में एफसीआरए संशोधन विधेयक को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बदलावों से गरीब और वंचित वर्गों के बीच काम करने वाले गैर-सरकारी संगठनों और संस्थानों पर असर पड़ सकता है। उनके अनुसार, ईसाई समुदाय द्वारा संचालित हजारों शैक्षणिक संस्थानों और कई अंतरराष्ट्रीय स्तर की धर्मार्थ संस्थाओं के कामकाज पर सरकारी नियंत्रण बढ़ने की आशंका है।
पत्र में उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19 और 26 के तहत मिले अधिकारों की रक्षा पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री से अपील की कि ऐसे महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ विस्तृत चर्चा की जाए। उन्होंने तीन कृषि कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि व्यापक सहमति के बिना कानून बनाने से बचना चाहिए।
