Om Prakash Rajbhar: उत्तर प्रदेश की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) पार्टी अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी में टूट का दावा किया है। राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होगी। राम गोपाल यादव ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी को चिट्ठी सौंपी है। खनन घोटाला और गोमती रिवर फ्रंट घोटाला का मास्टरमाइंड कौन है, पूरा उत्तर प्रदेश जानता है। शिकंजा कस रहा है तो सपा परेशान है। महाराष्ट्र बंगाल छोड़िए, समूची सपा, भाजपा में शामिल होने को तैयार बैठी है।
राजभर उत्तर प्रदेश में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए सहयोगी एसबीएसपी के प्रमुख हैं। 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले आए उनके इन दावों पर सपा ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। ये दावे ऐसे समय में आए हैं जब तृणमूल कांग्रेस अभूतपूर्व विभाजन से जूझ रही है, वहीं विपक्ष के एक अन्य प्रमुख दल शिवसेना (यूबीटी) को भी संकट का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उसके नौ लोकसभा सांसदों में से कुछ सत्तारूढ़ शिवसेना में शामिल होने के इच्छुक हैं।
टीएमसी में टूट, शिवसेना यूबीटी में बगावत
बता दें कि राजभर ने यह दावा ऐसे वक्त पर किया है जब टीएमसी में टूट हो चुकी है और शिवसेना यूबीटी में विभाजन तय दिख रहा है। टीएमसी के 50 से अधिक विधायक एक अलग गुट बनाकर पार्टी से अलग हो चुके हैं। वहीं, शिवसेना यूबीटी में दरार पड़ चुकी है और कभी भी टूट हो सकती है। पार्टी के 9 में से 6 विधायकों के अलग होने की खबरें हैं। आज ये 6 सांसद संजय राउत की प्रेस कांफ्रेंस में भी नहीं पहुंचे। इससे इन कयासों को जोर मिला कि ये सांसद जल्द ही अलग गुट का ऐलान कर सकते हैं।
ओम प्रकाश राजभर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया हैं। वह अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। पूर्व में वे उत्तर प्रदेश की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण पूर्व मंत्री रहे हैं। वर्तमान में वे सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व विधायक हैं वर्तमान मे अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के साथ कंधा मिलाकर काम करते हैं।
राजभर ने 1981 में कांशीराम के समय में राजनीति शुरू की। 2001 में इनका बहुजन समाज पार्टी में मायावती से सामंजस्य नहीं बैठा। राजभर भदोही का नाम बदल कर संत रविदास नगर रखने से सहमत नहीं थे। इसके बाद इन्होंने अपनी पार्टी बनाई। 2004 से चुनाव लड़ रही इस पार्टी ने यूपी और बिहार के चुनाव में अपने प्रत्याशी खड़े करने का निर्णय किया था। मगर इस बार भाजपा के साथ गठबंधन करके उन्होने भाजपा को सत्ता में बने रहने में सहयोग किया। राजभर ने पहले मुख्तार अंसारी के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। 2022 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) का जहूराबाद सीट पर मुकाबला बीजेपी के कालीचरण राजभर और बसपा की शादाब फातिमा से था। जहां पर उन्होंने 40 हजार से ज्यादा वोटों से बीजेपी प्रत्याशी को शिकस्त दी।
