महाराष्ट्र में दोनो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टियों के संभावित विलय को लेकर सियासी हलकों में एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच जयंत पाटिल का एक अहम बयान सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि जिनसे पार्टी विलय को लेकर बातचीत चल रही थी, अब वह नेतृत्वकर्ता नहीं रहे। अजित पवार के निधन के बाद परिस्थितियां बदल गई हैं और अब आगे का फैसला एनसीपी के वरिष्ठ नेता करेंगे।
जयंत पाटिल ने क्या कहा
जयंत पाटिल ने कहा- "दोनो पार्टी के विलय के लिए जिनसे मेरी बात हो रही थी..दादा अब नहीं रहे..सुनेत्रा भाभी अब डिप्टी सीएम बनने जा रही हैं... तो अब उन्हें और उनके विधायकों और नेताओं को तय करना है कि विलय कब और कैसे करना है... क्योंकि दोनो पार्टियों के नेता साथ आना चाहते हैं..और यह अजीत दादा की भी आखिरी इच्छा थी..अब देखते हैं।"
अब सुनेत्रा पवार के हाथ फैसला
बयान में साफ तौर पर कहा गया है कि अब यह तय करना सुनेत्रा पवार और उनकी पार्टी के विधायकों पर निर्भर करता है कि दोनों पार्टियों का विलय कब और किस तरह किया जाए। सूत्रों का कहना है कि दोनों गुटों के कई नेता एक साथ आने के इच्छुक हैं और संगठनात्मक स्तर पर भी इसके संकेत मिल रहे हैं। यह भी बताया गया कि पार्टी के भीतर लंबे समय से यह भावना रही है कि विभाजन से ज्यादा एकता राजनीतिक रूप से मजबूत स्थिति पैदा कर सकती है।
अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं
फिलहाल इस मुद्दे पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम पद संभालने के बाद ही विलय को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी नेतृत्व कब और किस रणनीति के तहत इस अहम फैसले की दिशा में आगे बढ़ता है।
