Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल के होने वाले मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शपथ से पहले ही ऐलान कर दिया है कि आज से पश्चिम बंगाल में सोनार बांग्ला का युग शुरू हो रहा है। सुभेंदु अधिकारी ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि आजादी के बाद पहली बार राज्य में भाजपा की सरकार बनने जा रही है।
सुवेंदु अधिकारी का पोस्ट
सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “पश्चिम बंगाल के लिए यह वास्तव में एक ऐतिहासिक सुबह है। विजनरी नेता और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का ‘सिटी ऑफ जॉय’ में स्वागत करना गर्व और उत्साह का क्षण है। आज, जब हम पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद पहली भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के साक्षी बन रहे हैं, तब हम अपने संस्थापक नेताओं के सपनों को साकार कर रहे हैं।”
‘सोनार बांग्ला का दौर आधिकारिक रूप से शुरू'
उन्होंने कहा कि यह बदलाव वर्षों के कथित कुशासन के अंत और विकास, शांति तथा समृद्धि पर केंद्रित “डबल इंजन” सरकार की शुरुआत का प्रतीक है। पोस्ट में लिखा गया, “आज दशकों के कुशासन का अंत और विकास, शांति एवं समृद्धि के ‘डबल इंजन’ युग की शुरुआत हो रही है। ‘सोनार बांग्ला’ का दौर आधिकारिक रूप से शुरू हो चुका है। स्वागत है, प्रधानमंत्री जी।”
बंगाल की राजनीति में नया अध्याय
पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया अध्याय शुरू करते हुए भाजपा ने पहली बार राज्य में सत्ता हासिल की है। पार्टी ने 294-सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर 15 वर्षों से शासन कर रही अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया, जो सिमटकर केवल 80 सीटों पर रह गई। ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) द्वारा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यभर से हजारों पार्टी कार्यकर्ताओं के शामिल होने की उम्मीद है।
सुवेंदु अधिकारी की राजनीतिक यात्रा
सुवेंदु अधिकारी के लिए शनिवार का दिन एक लंबी राजनीतिक यात्रा का अहम पड़ाव है। उन्होंने जमीनी स्तर के कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में राजनीति शुरू की थी, फिर वह तृणमूल के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हुए और बाद में ममता बनर्जी के प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरे। कभी ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी और ग्रामीण बंगाल में तृणमूल के विस्तार के प्रमुख रणनीतिकार माने जाने वाले अधिकारी ने 2020 में मतभेदों के चलते भाजपा का दामन थाम लिया और जल्द ही राज्य में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा बन गए। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को हराने के बाद ही वह बंगाल की राजनीति के केंद्रीय नेता बन चुके थे। अब भाजपा की इस बड़ी जीत ने उन्हें राज्य की राजनीति को नया स्वरूप देने के प्रयासों के केंद्र में ला खड़ा किया है। पूर्व मेदिनीपुर जिले से आने वाले अधिकारी पिछले पांच दशकों में बंगाल के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं, जो कोलकाता के पारंपरिक राजनीतिक केंद्र से नहीं, बल्कि राज्य के किसी जिले से उभरे हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले बंगाल के आखिरी मुख्यमंत्री अजय मुखर्जी थे, जो 1970 में मुख्यमंत्री बने थे। संयोग से वह भी अविभाजित मेदिनीपुर क्षेत्र से ही थे, जिसे लंबे समय से बंगाल की राजनीति का प्रभावशाली क्षेत्र माना जाता है।
