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तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने मोदी, शाह से की मुलाकात; जानें किन मुद्दों पर हुई बात

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी और अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से सुरक्षा और विकास के मुद्दों पर चर्चा की। नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद रेड्डी ने पहली मुलाकात थी। आपको इस मुलाकात की खास बातें बताते हैं।

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CM रेवंत रेड्डी ने PM मोदी और अमित शाह से की मुलाकात।

Photo : Times Now Digital

CM Revanth Reddy meets PM Modi: तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने केंद्र में नयी सरकार के गठन के बाद बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और राज्य का विकास सुनिश्चित करने के साथ ही उसके सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।

रेवंत रेड्डी ने मोदी-शाह से की मुलाकात

इन मुलाकातों में मुख्यमंत्री ने खुफिया तंत्र के आधुनिकीकरण से लेकर लंबे समय से चल रहे विभाजन विवादों तक के मुद्दों पर चर्चा की। महत्वपूर्ण ये रहा कि इस दौरान उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क भी मौजूद रहे। पिछले महीने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद मोदी और रेड्डी के बीच यह पहली मुलाकात थी।

डिप्टी सीएम ने मीडिया को दी जानकारी

विक्रमार्क ने पत्रकारों से कहा, 'हमने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों के सामने अपनी बातें रखीं और सभी लंबित मुद्दों पर चर्चा की। हमें सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।' मोदी के साथ अपनी बैठक में रेड्डी ने तेलंगाना की प्रगति के लिए एक महत्वाकांक्षी 10-सूत्री एजेंडा प्रस्तुत किया। इन प्रस्तावों में सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड को कोयला ब्लॉकों का आवंटन, हैदराबाद में सूचना प्रौद्योगिकी निवेश क्षेत्र का पुनरुद्धार, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 25 लाख घरों को मंजूरी देना, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन में तेलंगाना का समावेश और हैदराबाद में एक भारतीय प्रबंधन संस्थान की स्थापना शामिल था।

मोदी और शाह से किन मुद्दों पर हुई बात?

इनके अलावा रक्षा भूमि आवंटन, राज्य के राजमार्गों के उन्नयन और क्षेत्रीय रिंग रोड के शीघ्र निर्माण के अनुरोधों के साथ वार्ता के दौरान बुनियादी ढांचे और संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर प्रमुखता से चर्चा हुई। शाह के साथ बैठक में रेड्डी ने दक्षिणी राज्य के खुफिया ढांचे के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता की मांग की।

उन्होंने तेलंगाना एंटी-नारकोटिक्स ब्यूरो (टीजीएएनबी) के लिए 88 करोड़ रुपये और तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (टीजीसीएसबी) के लिए 90 करोड़ रुपये का अनुरोध किया, जिसमें नशीली दवाओं से संबंधित और साइबर अपराधों से निपटने के लिए अत्याधुनिक तकनीक की आवश्यकता पर जोर दिया गया। आंध्र प्रदेश के विभाजन के दौरान आवंटित वर्तमान 61 पदों के अपर्याप्त होने का हवाला देते हुए रेड्डी ने सुरक्षा परिदृश्य पर प्रकाश डाला और अतिरिक्त 29 आईपीएस पदों पर जोर दिया। उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) कैडर की समीक्षा का आग्रह किया, जो पिछली बार 2016 में हुई थी।

सुरक्षा मजबूत करने पर सीएम ने दिया जोर

रेड्डी ने पूर्व में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों में सुरक्षा मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने आदिलाबाद, मंचेरियल और कोमाराम भीम आसिफाबाद जिलों में सुरक्षा बल शिविर स्थापित करने की मांग करते हुए सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना के तहत उन्हें बहाल करने का अनुरोध किया। रेड्डी ने माओवादी गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा पर रणनीतिक स्थानों पर सीआरपीएफ जेटीएफ शिविरों की भी वकालत की। विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) के लिए लंबित 18.31 करोड़ रुपये की राशि भी इस एजेंडे में थी।

मुख्यमंत्री ने आंध्र प्रदेश के विभाजन से उपजे अनसुलझे मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने मोदी और शाह दोनों से सरकारी इमारतों, निगमों और संस्थानों के वितरण से संबंधित विवादों के 'सामंजस्यपूर्ण समाधान' को आंध्र प्रदेश-तेलंगाना पुनर्गठन अधिनियम के अनुसार हल करने का आग्रह किया। रेड्डी ने पिछले साल दक्षिणी राज्य में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद तेलंगाना के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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