TCS Nashik Case: महाराष्ट्र के नासिक जिले में आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस पर जबरन धर्मांतरण, यौन शोषण और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार निदा खान (Nida Khan) की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। उसे 14 दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया है।
25 मार्च से फरार चल रही निदा खान की तलाश में नासिक पुलिस की दो टीमें लगातार जुटी हुई थीं। आखिरकार उसे छत्रपति संभाजीनगर के नारेगांव स्थित कैसर कॉलोनी के एक फ्लैट से हिरासत में लिया गया है।
सीएम फडणवीस ने की सख्त कार्रवाई करने की बात
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे एक 'बेहद गंभीर' मामला बताया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस प्रकरण की पूरी गंभीरता के साथ जांच कर रही है और संबंधित जांच एजेंसियों को मामले की तह तक जाने के निर्देश दिए गए हैं।
सीएम फडणवीस के अनुसार, जांच एजेंसियां फिलहाल एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही हैं ताकि इस टेक हब के भीतर हो रहे यौन शोषण और धार्मिक भावनाओं को आहत करने जैसे गंभीर आरोपों की सच्चाई का पता लगाया जा सके। सरकार का मुख्य उद्देश्य उन चेहरों को बेनकाब करना है जो इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त हैं, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
कौन है निदा खान?
सोशल मीडिया पर 'एचआर हेड' के नाम से वायरल निदा खान को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे हुए। हालांकि, उसके परिवार ने कहा कि उसका एचआर विभाग से कोई लेना देना नहीं था। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह कंपनी में एक टेलीकॉलर थी।
उसके परिवारा ने बताया था कि वो अपने पहले बच्चे की इस दुनिया में आने की तैयारी कर रही है। पिछले साल शादी के बाद निदा खान जनवरी 2026 में पति के साथ रहने के लिए मुंबई चली गई. वहां वह कंपनी के मालाड स्थित बीपीओ में काम कर रही थी लेकिन 9 अप्रैल को उसे सस्पेंड कर दिया गया।
निदा खान दिसंबर 2021 में टीसीएस के बीपीओ (BPO) में जॉइन हुई थी और सेल्स टीम में काम करती थी। उसके ऊपर कई सीनियर अधिकारी थे। फैमिली ने भी साफ कहा है कि निदा का एचआर विभाग से कोई संबंध नहीं था। पुलिस ने निदा खान को इस मामले में आरोपी बनाया है।
क्या है टीसीएस नासिक विवाद?
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक यूनिट इस समय एक बेहद गंभीर विवाद के घेरे में है, जहां कर्मचारियों के एक विशेष समूह पर महिलाओं को निशाना बनाने और गंभीर प्रताड़ना के आरोप लगे हैं। इस मामले में अब तक नौ FIR दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें से एक पुरुष कर्मचारी द्वारा दर्ज कराई गई है। इन शिकायतों में यौन उत्पीड़न, जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयास और कर्मचारियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध मांसाहार (नॉनवेज) खाने के लिए मजबूर करने जैसे चौंकाने वाले दावे किए गए हैं।
पुलिस जांच के अनुसार, कुछ आरोपियों ने अपने वरिष्ठ पदों का दुरुपयोग कर अधीनस्थों को प्रताड़ित किया। इस मामले में निदा खान नामक कर्मचारी पर भी आरोप है कि उन्होंने शिकायत मिलने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की और पीड़ित महिलाओं को चुप रहने के लिए दबाव बनाया।
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इन आरोपों को 'अत्यंत चिंताजनक और परेशान करने वाला' बताते हुए कंपनी के भीतर उच्च स्तरीय आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं, ताकि जवाबदेही तय की जा सके।
