साल 2024 के आम चुनाव से पहले दक्षिण भारत के तमिलनाडु में बुधवार (एक मार्च, 2023) को विपक्षी एकता देखने को मिली। चेन्नई शहर में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) की बड़ी मीटिंग में एक मंच पर विपक्षी दलों के कई बड़े चेहरे नजर आए, जिनमें जम्मू कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, कांग्रेस चीफ मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, डीएमके के टॉप नेता एम के स्टालिन थे।
अब्दुल्ला ने इस दौरान सबके सामने बड़ी बात कही, "आइए, हम यह भूल जाते हैं कि कौन प्रधानमंत्री बनने जा रहा है। पहले हम 2024 का आम चुनाव जीतते हैं।" अब्दुल्ला के अनुसार, "पहले चुनाव जीतिए, फिर सोचिएगा कि कौन पीएम बनेगा। पीएम मायने नहीं रखता, राष्ट्र मायने रखता है।" उनके इस बयान से समझा जा सकता है कि लोकसभा चुनाव को जीतना उनके लिए पहली और बड़ी प्राथमिकता (पीएम कौन होगा?...इसकी तुलना में) है। हालांकि, उन्होंने प्रधानमंत्री पद के लिए स्टालिन का सपोर्ट किया।
जम्मू और कश्मीर के पूर्व सीएम ने स्टालिन के जन्मदिन कहा कि अगर विपक्षी दल साथ आते हैं और अगले साल आम चुनाव जीतते हैं तो तमिलनाडु के सीएम (एम के स्टालिन) के पीएम बनने की संभावना है। अब्दुल्ला ने पीएम पद के संभावित उम्मीदवारों के बारे में सवाल दागे जाने पर बताया कि आम चुनावों में एकजुट विपक्ष की जीत के बाद ठीक समय पर देश को एकजुट करने उसका नेतृत्व करने के लिए सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति पर निर्णय लिया जा सकता है।
स्टालिन के पीएम बनने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘क्यों नहीं? वह प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन सकते?’’ विपक्षी एकता के बारे में आगे प्रश्न पर वह बोले कि स्टालिन और द्रमुक ने बहुत अच्छा काम किया है। जब देश की विविधता की रक्षा होती है तो एकता की रक्षा की जाती है। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी ने विपक्ष और राष्ट्रीय एकता को पोषित करने को लेकर अच्छा काम किया है।
