Amit Shah News: जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि उनके योगदान ने देश की एकता एवं संप्रभुता को अक्षुण्ण रखने में अहम भूमिका निभाई। शाह ने मुखर्जी को देश के महान नेताओं में से एक बताया। दिल्ली में NAFED के ऑक्शन पोर्टल का उद्घाटन करते हुए शाह ने कहा कि 'भारतीय जनता पार्टी के लिए 23 जून विशेष महत्व रखता है। यह वही दिन है जब देश देश की एकता के लिए मुखर्जी ने अपने प्राणों की आहुति दे दी।'
जम्मू-कश्मीर की एक जेल में संदिग्ध हालात में हुई मौत
गृह मंत्री ने कहा कि आज, 23 जून, भारतीय जनता पार्टी से जुड़े मेरे जैसे कई कार्यकर्ताओं के लिए बहुत ही प्रेरणादायक दिन है। इसी दिन श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश को एकजुट रखने और 'एक राष्ट्र, एक संविधान, एक नेता' के आदर्श को पूरा करने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। गृह मंत्री ने कहा कि मुखर्जी की जम्मू-कश्मीर की एक जेल में हिरासत के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी और उन्हें चिकित्सा उपचार भी नहीं मिला था।
पश्चिम बंगाल के लिए लड़ी लड़ाई
शाह ने भारत के विभाजन के दौरान मुखर्जी की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए लड़ाई लड़ी कि पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा बना रहे, जबकि पूर्वी बंगाल पाकिस्तान का हिस्सा बन गया। उन्होंने कहा, "आजादी से पहले, जब विभाजन हो रहा था, तब श्यामा प्रसाद मुखर्जी ही थे जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़कर यह सुनिश्चित किया कि पश्चिम बंगाल भारत में रहेगा और पूर्वी बंगाल पाकिस्तान में जाएगा। इसी वजह से आज पश्चिम बंगाल भारत का एक अभिन्न अंग है।"
बाद में कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू किया गया
अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन विशेष दर्जे का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि इस प्रावधान ने क्षेत्र के लिए एक अलग संवैधानिक ढांचा तैयार कर दिया था। उन्होंने कहा, "देश को आजादी मिलने के बाद कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू किया गया। कश्मीर का अपना राज्य ध्वज था, अपना अलग संविधान था, अपना प्रधानमंत्री और अपना राष्ट्रपति था। यह अवधारणा भारत की एकता और अखंडता के लिए बेहद खतरनाक थी।"
दिल्ली से कश्मीर तक एक मार्च का नेतृत्व किया
गृह मंत्री ने कहा कि मुखर्जी ने इस व्यवस्था के खिलाफ एक आंदोलन शुरू किया और नारा दिया कि एक देश में "दो विधान, दो प्रधान और दो निशान (संविधान, प्रधानमंत्री और ध्वज) नहीं हो सकते।" शाह ने तत्कालीन परमिट प्रणाली के खिलाफ मुखर्जी के अभियान को याद करते हुए कहा, "उन्होंने दिल्ली से कश्मीर तक एक मार्च का नेतृत्व किया। जब वे कश्मीर की सीमा पर पहुंचे, तो उनसे परमिट मांगा गया। उन्होंने कहा, 'कश्मीर मेरे देश का हिस्सा है; मुझे किसी परमिट की जरूरत नहीं है।'"
