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जेल की कोठरी में बिभव कुमार, दिल्ली पुलिस के इन 20 सवालों के देने होंगे जवाब! जानें स्वाति मालीवाल केस से जुड़ा अपडेट

Delhi News: दिल्ली पुलिस ने स्वाति मालीवाल पर 'हमले' के मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सहयोगी बिभव कुमार को गिरफ्तार किया है। इस घटनाक्रम में तेजी से एक्शन लिया जा रहा है। गिरफ्तारी के बाद बिभव को पुलिस के किन-किन सवालों का सामना करना पड़ सकता है, इस रिपोर्ट में पढ़ें।

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बिभव कुमार से दिल्ली पुलिस के सवालों की सूची।

Photo : Times Now Digital

Swati Maliwal Case Update: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सहयोगी बिभव कुमार को आम आदमी पार्टी (आप) सांसद स्वाति मालीवाल पर कथित हमले के मामले में शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इस मामले में बिभव की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें पुलिस के सवालों का सामना करना पड़ रहा है। उनसे पूछताछ में पुलिस द्वारा क्या-क्या संभावित सवाल किए जा रहे हैं, नीचे पढ़ें।

बिभव कुमार से पूछे जा रहे संभावित 20 सवाल

1). स्वाति मालीवाल कितने बजे सीएम आवास पहुंची?

2). आपको किसने जानकारी दी कि स्वाति मालीवाल सीएम आवास में हैं?

3). आप उस वक्त कहां थे?

4). आप सीएम अरविंद केजरीवाल के निजी सचिव हैं ऐसे में क्या स्वाति मालीवाल ने सीएम से मिलने से पहले सीएम ऑफिस से अपॉइंटमेंट लिया था या फिर आने की जानकारी दी थी?

5). आप जब ड्राइंग रूम में पहुंचे वहां कौन-कौन था?

6). वहां पहुंचते ही आपके और स्वाति के बीच क्या बात हुई?

7). उस वक्त स्वाति मालीवाल ड्राइंग रूम में कहां बैठी थी?

8). क्या आपके और स्वाति के बीच वहां झगड़ा हुआ? हुआ तो वजह क्या थी?

9). क्या आपने स्वाति मालीवाल पर हाथ उठाया था?

10). क्या आपने स्वाति मालीवाल को चांटा मारा और सिर सेंटर टेबल पर मारा?

11). क्या आपने उनकी शर्ट खिंची और लात मारी?

12). आप दोनों के बीच ये बहस कितनी देर तक चली?

13). क्या सीएम आवास की सिक्योरिटी को आपने ने ड्राइंग रूम में बुलाया या फिर शोर सुनकर वो खुद वहां पहुंची?

14). जो वीडियो आपकी तरफ से जारी किया गया क्या उस 52 सेकंड के अलावा आपके पास कुछ और मोबाइल वीडियो रिकॉर्डिंग है?

15). स्वाति ने जब 112 नम्बर पर कॉल किया क्या उस वक्त आप मौके पर मौजूद थे?

16). अगर स्वाति मालीवाल जबरन सीएम आवास में घुस रही थीं तो आपकी या फिर सीएम आवास की तरफ से पुलिस कॉल क्यों नहीं की गई?

17). घटना के बाद आप कहां-कहां गए और किसके साथ मौजदू थे?

18). आपने इतने दिनों बाद शिकायत क्यों की? यानि शिकायत में देरी क्यों की?

19). आपको जब पता चला कि आपके खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है, तो आपने संबंधित थाने या पुलिस टीम से संपर्क क्यों नहीं किया?

20). क्या घटना के बाद आपने स्वाति मालीवाल से सम्पर्क करने की कोशिश की?

कयास लगाए जा रहे हैं कि बिभव कुमार को इन 20 सवालों का सामना करना पड़ रहा होगा। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस की एक टीम दोपहर में कुमार को पूछताछ के लिए मुख्यमंत्री आवास से थाने ले गई। स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया है कि 13 मई को जब वह मुख्यमंत्री से मिलने उनके आवास पर गई थीं तब कुमार ने उनके साथ मारपीट की।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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