पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में दो दिन पहले कोलकाता में हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को लेकर चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने रविवार को गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस हिंसा को इस्लामी कट्टरपंथियों ने अंजाम दिया। इस दौरान उन्होने हिंसा के पीछे विदेशी ताकतों के भी समर्थन की आशंका जताई।
शुक्रवार को प्रदर्शन के दौरान हुई थी हिंसा
गौरतलब है कि शुक्रवार को हुए इस प्रदर्शन के दौरान वामपंथी समर्थित प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प हो गई थी। इसके बाद सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। राज्य सरकार ने शुक्रवार के नीट प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोपियों के खिलाफ हाल ही में लागू किए गए गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू की है। उन्होंने चेतावनी भी दी कि हिंसा भड़काने वालों को ऐसी सजा मिलेगी जिसे उनकी अगली तीन पीढ़ियां भी याद रखेंगी।
हिंसा करने वाले 70 लोगों की हुई पहचान
शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में कहा था कि रैली में शामिल जिन करीब 70 लोगों की पहचान की गई है, वे छात्र नहीं हैं। साथ ही नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में चल रहे आंदोलन से भी उनका कोई संबंध नहीं है।
हिंसा करने वाले छात्र नहीं, जमाती हैं
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने के बाद नंदीग्राम में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान अधिकारी ने अपने इस दावे को दोहराया। उन्होंने कहा कि इन लोगों का आंदोलन से कोई संबंध नहीं है। ये छात्र नहीं हैं। ये जमाती (इस्लामी) कट्टरपंथी हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाएंगी कि क्या इन्हें विदेशी ताकतों का समर्थन प्राप्त था।
ये भी हो सकती है हिंसा की वजह
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य में भाजपा सरकार के कई फैसलों के प्रति नाराजगी भी हिंसा की वजह हो सकती है। इनमें गैर-पंजीकृत मदरसों के खिलाफ कार्रवाई, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) प्रमाणपत्रों से संबंधित अदालत के निर्देशों का पालन, पशु वध संबंधी कानूनों का सख्ती से पालन और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के उपाय शामिल हैं। प्रदर्शन के दौरान एक पत्रकार पर हुए हमले का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया कर्मियों को जानबूझकर निशाना बनाया गया और उनकी ’’जान लेने की कोशिश’’ की गई। उन्होंने दोहराया कि हिंसा में शामिल लोगों का प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं था और उनके खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
कल पेश होगा लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026
इस दौरान सोमवार को लोकसभा में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा कि यह परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस विधेयक के जरिए दो साल पुराने प्रश्नपत्र लीक रोधी कानून में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। इसके तहत आरोपियों के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए प्रत्येक राज्य में त्वरित अदालतें स्थापित करने और सजा को अधिक कठोर बनाने का प्रावधान है। इस प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, प्रश्नपत्र लीक के मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। दोषियों के लिए न्यूनतम पांच वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष के कारावास के साथ 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने यह प्रस्तावित कानून ऐसे समय लाने की घोषणा की है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में नीट प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर छात्रों का आंदोलन पिछले कुछ दिनों में तेज हो गया था। कॉजपा ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा उसकी अन्य मांगें स्वीकार किए जाने के बाद अपना 36 दिन से चल रहा आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की।
