BRICS Summit 2026: ब्रिक्स समिट 2026 के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शुक्रवार को दिल्ली पहुंचेंगे। चीनी राष्ट्रपति 7 साल बाद भारत आ रहे हैं। उनकी यह यात्रा गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के रिश्ते में आई कड़वाहट के बाद सामान्य होते रिश्ते के बीच हो रही है। जिनपिंग की इस यात्रा पर दुनिया भर की नजरें लगी हैं। जिनपिंग की यह यात्रा दोनों देशों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है, इस बारे में CGTN में काम करने वाली चीन की पत्रकार ली जिंगजिंग ने प्रतिक्रिया दी है। ब्रिक्स सम्मेलन को कवर करने आईं जिंगजिंग ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि 'यह समिट काफी अहम है क्योंकि बदलती वैश्विक व्यवस्था में दुनिया चाहती है कि भारत और चीन दोनों मिलकर एक साथ काम करें।'
दोनों देशों के लोग भी यही देखना चाहते हैं-चीनी पत्रकार
जिंगजिंग ने कहा, 'यह यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है और ब्रिक्स की बैठक भी काफी अहम है। मुझे लगता है कि चीन और भारत के लोग भी यही देखना चाहते हैं और दुनिया के लोग भी यही देखना चाहते हैं। चीन और भारत पड़ोसी देश हैं और बड़ी आबादी वाले दुनिया के दो सबसे बड़े विकासशील देश भी हैं। अगर हम साथ मिलकर काम करें तो हमारे सामने बहुत संभावनाएं हैं। हम व्यापार, हरित विकास, ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग कर सकते हैं। इससे दोनों देशों के लोगों के साथ-साथ पूरी दुनिया को फायदा होगा। मुझे पूरा विश्वास है कि पूरी दुनिया चीन और भारत के बीच सहयोग पर नजर रख रही है।'
'ग्लोबल साउथ के साथ मजबूती से खड़ा है चीन'
चीनी पत्रकार ने आगे कहा कि चीन ग्लोबल साउथ के साथ मजबूती से खड़ा है और वैश्विक मंच पर उसकी चिंताओं को मजबूती से उठाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स समूह के सदस्यों के लिए मिलकर काम करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति शी ने यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि चीन विकास के किसी भी स्तर पर पहुंच जाए, वह हमेशा ग्लोबल साउथ का सदस्य रहेगा। चीन हमेशा ग्लोबल साउथ के विकास का समर्थन करता है और विकासशील देशों के साथ खड़ा रहता है, ताकि हमारी आवाज और हित वैश्विक मंच पर सुने जाएं और विश्व व्यवस्था हम सभी के लिए अधिक न्यायपूर्ण हो। यह शिखर सम्मेलन निश्चित रूप से चीन, भारत तथा ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों और संवाद साझेदारों के बीच सहयोग और संवाद को मजबूत करने के लिए कई परिणाम लेकर आएगा।'
ब्रिक्स के सदस्य देशों की एक साझा चिंता है-जिंगजिंग
उन्होंने आगे कहा, 'मौजूदा विश्व व्यवस्था धीरे-धीरे बदल रही है। विकासशील देश, जिन्हें हम ग्लोबल साउथ कहते हैं, ऐसी समान और न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, जो उनके हितों और जरूरतों को पूरा करे। ब्रिक्स के सदस्य देशों की एक साझा चिंता है। उन्हें लगता है कि वैश्विक मंच पर उनके लोगों के हितों और आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा है। कई बार उन्हें पश्चिमी संस्थाओं के निर्देशों का पालन करने के लिए अपने हितों, राष्ट्रीय हितों या संप्रभुता से समझौता करना पड़ता है।' उन्होंने कहा कि अब ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे क्षेत्रीय सहयोग मंचों के माध्यम से विकासशील देश अपनी चिंताओं को सामने रख रहे हैं और व्यापार तथा हरित विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं।
मौजूदा टैरिफ तनाव का जिक्र किया
जिंगजिंग ने कहा कि खासकर ऐसे समय में जब दुनिया जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, हमारे लिए अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए मिलकर काम करना बेहद जरूरी है। चीन ग्लोबल साउथ के विकास का मजबूती से समर्थन करता है। अमेरिका के साथ मौजूदा टैरिफ तनाव का जिक्र करते हुए चीनी पत्रकार ने कहा कि ब्रिक्स मंच इन चिंताओं पर चर्चा करने और समाधान तलाशने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा, 'ब्रिक्स शिखर सम्मेलन सहयोग के बारे में है। पिछले कुछ दशकों में ग्लोबल साउथ के देशों के बीच व्यापार में तेजी से वृद्धि हुई है। यह चीन, भारत और ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों के लिए फायदेमंद है। इसलिए मुझे पूरा विश्वास है कि इस शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाली सभी द्विपक्षीय बैठकें ब्रिक्स के सभी सदस्यों के लिए लाभकारी होंगी। यह बेहद महत्वपूर्ण होगा।'
