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एयर इंडिया हादसे पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगी जांच रिपोर्ट; एएआईबी को दिया तीन सप्ताह का समय

अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया हादसे पर सुप्रीम कोर्ट ने जांच रिपोर्ट मांगी है। इस विमान दुर्घटना में कुल 241 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में 169 भारतीय, 52 ब्रिटिश नागरिक, सात पुर्तगाली नागरिक, एक कनाडाई नागरिक और 12 चालक दल के सदस्य शामिल थे।

सुप्रीम कोर्ट

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Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

12 जून 2025 को गुजरात के अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया प्लेन क्रैश हादसे में सुप्रीम कोर्ट ने एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) से जांच रिपोर्ट मांगी है। दरअसल मामले में सुनवाई के दौरान शीर्ष कोर्ट को बताया गया कि इस हादसे की जांच अपने अंतिम चरण में है, इस पर शीर्ष कोर्ट ने एएआईबी को निर्देशित करते हुए कहा कि वह तीन सप्ताह में संक्षिप्त जांच रिपोर्ट अदालत में दाखिल करे। इस बेहद दर्दनाक हादसे में विमान में सवार 260 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें 241 यात्री और चालक दल के लोग थे। वहीं हादसे में सिर्फ एक सदस्य जीवित बचा था।

मामले में आज सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सुनवाई की। इस दौरान केंद्र सरकार और डीजीसीए का प्रतिनिधित्व करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि एएआईबी की जांच अंतिम चरण में है। साथ ही इसके कुछ हिस्सों को विदेशों में किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस मामले से संबंधित तीन याचिकाओं पर व्यापक सुनवाई के लिए तीन सप्ताह बाद सुनवाई की जा सकती है।

शुरुआत में पीठ का विचार था कि एएआईबी (विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो) की जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के सामने रखी जाए। इस पर सरकार की ओर से पेश हुए मेहता ने न्यायाधीशों को भरोसा दिलाया कि जांच से जुड़ी पूरी जानकारी अदालत को दी जाएगी। पीठ ने साफ किया कि एएआईबी का काम केवल यह पता लगाना है कि दुर्घटना कैसे हुई, न कि किसी पर जानबूझकर गलती या मंशा का आरोप लगाना।

वहीं, एनजीओ सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि बोइंग 787 विमानों से जुड़ी ऐसी ही घटनाएं पहले भी तीन बार हो चुकी हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने इस संबंध में दाखिल याचिकाओं पर अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने भूषण को चेताया कि अपुष्ट मीडिया रिपोर्टों पर ज्यादा भरोसा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह एक खबर आई थी कि लंदन से दिल्ली आ रहे ड्रीमलाइनर विमान में ईंधन स्विच में दिक्कत हुई, लेकिन बाद में एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि सब कुछ सामान्य था। न्यायाधीश ने कहा कि किसी खास एयरलाइन पर टिप्पणी करते समय अदालत को बेहद सावधानी बरतनी चाहिए और याद दिलाया कि ड्रीमलाइनर को कभी दुनिया के बेहतरीन विमानों में गिना जाता था।

भूषण ने यह भी दावा किया कि 8,000 से अधिक पायलटों का मानना है कि बोइंग 787 सुरक्षित नहीं है और इसे उड़ान से रोका जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि एएआईबी की जांच टीम में शामिल पांच सदस्य डीजीसीए से हैं। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने व्यंग्य करते हुए कहा कि भूषण को संतुष्ट करने का एकमात्र तरीका यही होगा कि जांच समिति की अध्यक्षता खुद भूषण को सौंप दी जाए।

इसके बाद पीठ ने केंद्र सरकार से अब तक जांच में अपनाई गई प्रक्रियाओं और नियमों पर एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पहले एएआईबी की जांच रिपोर्ट का नतीजा आने दिया जाए, उसके बाद यह तय किया जाएगा कि अदालत की निगरानी में अलग से जांच की जरूरत है या नहीं। इसके साथ ही अदालत ने तीनों याचिकाओं की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय कर दी।

इस विमान दुर्घटना में कुल 241 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में 169 भारतीय, 52 ब्रिटिश नागरिक, सात पुर्तगाली नागरिक, एक कनाडाई नागरिक और 12 चालक दल के सदस्य शामिल थे। इस हादसे में केवल एक व्यक्ति जीवित बचा, जो ब्रिटेन का नागरिक विश्वासकुमार रमेश है।

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शिव शुक्ला
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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