सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें गुजरात के उस दरगाह पर उर्स आयोजित करने की मांग की गई थी, जिसे सरकार ने अवैध कब्जे के कारण ध्वस्त कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने गिर सोमनाथ जिले में ध्वस्तीकरण में ध्वस्त की जा चुकी दरगाह पर 1 से 3 फरवरी तक उर्स आयोजित करने की अनुमति देने संबंधी याचिका खारिज की।
गुजरात सरकार ने क्या कहा
इस मामले की सुनवई के दौरान गुजरात के अधिकारियों ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि सरकारी जमीन पर बने मंदिरों समेत अनधिकृत निर्माणों को जमींदोज किया गया है। गुजरात सरकार ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि उल्लेखित भूमि पर धार्मिक कार्यक्रमों समेत किसी भी तरह की गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा रही।
सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ
न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने गुजरात सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों पर गौर किया कि सरकारी जमीन पर मंदिरों समेत सभी अनधिकृत निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया है। मेहता ने कहा कि उक्त भूमि पर हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों समेत किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा रही, जिसपर पहले अतिक्रमण था।
आवदेक का दावा
आवेदक की ओर से उपस्थित वकील ने कहा कि वहां एक दरगाह थी, जिसे प्राधिकारियों ने ध्वस्त कर दिया। उन्होंने कहा कि दरगाह पर ‘उर्स’ उत्सव मनाने की परंपरा पिछले कई वर्षों से जारी है और अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को इसके लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने 27 जनवरी को कहा था कि वह गिर सोमनाथ जिले में बिना पूर्व अनुमति के आवासीय और धार्मिक संरचनाओं को कथित रूप से ध्वस्त करने के लिए गुजरात के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका समेत विभिन्न याचिकाओं पर तीन सप्ताह बाद सुनवाई करेगी।
