आप हाईकोर्ट क्यों नहीं गए- असम CM के 'मियां' टिप्पणी के खिलाफ दाखिल याचिका पर SC का सुनवाई से इंकार
- Edited by: शिशुपाल कुमार
- Updated Feb 16, 2026, 01:56 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ कथित ‘मियां’ टिप्पणी और अन्य सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर SIT जांच और FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ याचिकाओं पर SC ने सुनवाई से किया इंकार (फोटो-ANI&PTI)
सुप्रीम कोर्ट से असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा को बड़ी राहत मिली है। मियां वाली टिप्पणी के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार कर दिया है। सरमा के खिलाफ विशेष जांच दल (SIT) से जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि मुख्यमंत्री ने एक समुदाय के संदर्भ में कथित तौर पर ‘मियां’ टिप्पणी सहित सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और भेदभावपूर्ण बयान दिए, जिन्हें याचिकाकर्ताओं ने ‘हेट स्पीच’ बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने वायरल वीडियो को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के खिलाफ कार्रवाई के अनुरोध वाली याचिकाओं पर कहा कि हम सभी पक्षों से संयम बरतने और संवैधानिक नैतिकता की सीमाओं के भीतर रहने का आग्रह करेंगे, लेकिन चुनाव से ठीक पहले यह एक चलन बनता जा रहा है। यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है कि हर मामला यहीं आकर समाप्त होता है; हमने पहले ही उच्च न्यायालयों को पर्यावरण और वाणिज्यिक मुकदमों से वंचित कर दिया है। आप गुवाहाटी उच्च न्यायालय क्यों नहीं गए, उसकी शक्ति को कम मत आंकिए।
CJI ने हाईकोर्ट जाने को कहा
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि इस तरह के मुद्दों पर संबंधित क्षेत्राधिकार वाले उच्च न्यायालय को पहले विचार करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालयों की शक्तियों को दरकिनार नहीं किया जाना चाहिए और याचिकाकर्ताओं को पहले वहीं प्रभावी उपाय तलाशने चाहिए। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि विभिन्न अधिकारियों के खिलाफ निर्देश देने की मांग की गई है, लेकिन इन सभी पहलुओं पर सक्षम उच्च न्यायालय द्वारा ही प्रभावी ढंग से सुनवाई की जानी चाहिए। अदालत ने बिना मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए याचिकाकर्ताओं को संबंधित उच्च न्यायालय का रुख करने की स्वतंत्रता दी।
हाईकोर्ट में होगी जल्द सुनवाई!
साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया कि मामले की प्रकृति को देखते हुए याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि यदि उच्च न्यायालय से मिलने वाले राहत से याचिकाकर्ता संतुष्ट नहीं होते हैं, तो वे बाद में शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
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