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सेना में महिलाओं को मिलेगा परमानेंट कमीशन, SC का आदेश; जानिए SSC और PC से जुड़ा क्या है पूरा मामला

SC On Women Permanent Commission: सुप्रीम कोर्ट ने महिला सैन्य अधिकारियों के पक्ष में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि जिन अधिकारियों को गलत मूल्यांकन (ACR) के कारण परमानेंट कमीशन (PC) नहीं मिला, वे पूर्ण पेंशन की हकदार हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसी अधिकारियों को 20 साल की सेवा पूरी मानी जाएगी, भले ही उन्हें पहले ही सेवा से मुक्त कर दिया गया हो। यह फैसला विंग कमांडर सुचेता एडन और अन्य की याचिका पर आया, जिसमें 2019 की नीति और आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल के फैसलों को चुनौती दी गई थी।

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कोर्ट ने कहा कि सेना में महिलाओं को मिलेगा परमानेंट कमीशन। AI GENERATED

SC On Women Permanent Commission: भारतीय सेना में महिलाओं की भूमिका और समानता को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। । कोर्ट ने कहा कि वे महिला सैन्य अधिकारी पूरे पेंशन की हकदार हैं, जिन्हें गलत मूल्यांकन के कारण परमानेंट कमीशन नहीं दिया गया था।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इन अधिकारियों को पेंशन के लिए जरूरी कम से कम 20 साल की सेवा पूरी की हुई माना जाएगा, भले ही उन्हें सेवा से पहले ही मुक्त कर दिया गया हो।

सुप्रीम कोर्ट में विंग कमांडर सुचेता एडन और अन्य द्वारा याचिका दायर की गई थी। याचिका के तहत 2019 में हुए नीतिगत बदलावों और पिछले आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल (AFT) के फैसलों के आधार पर परमानेंट कमीशन (PC) न दिए जाने को चुनौती दी गई थी।

सीजीआई ने ACR को लेकर क्या चिंता जताई?

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि महिला अधिकारियों की सालाना गोपनीय रिपोर्ट (ACR) को अक्सर लापरवाही से ग्रेड दिया जाता था, इस सोच के साथ कि वे करियर में आगे बढ़ने या परमानेंट कमीशन के लिए योग्य नहीं होंगी, जिसका महिलाओं की योग्यता पर बुरा असर पड़ा है।

चीफ जस्टिस ने कहा कि महिला अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACRs) अक्सर इस धारणा के साथ 'लापरवाही से' लिखी जाती थीं कि उन्हें करियर उन्नति या स्थायी कमीशन नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा, 'एसीआर इस अनुमान के साथ लिखे गए कि उन्हें करियर में आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिलेगा। इससे उनकी समग्र योग्यता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।'

पेंशन को लेकर कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने फैसले में यह भी बताया कि जिन महिला अधिकारियों ने कोर्ट में केस लड़ते-लड़ते सेवा खो दी उन्हें 20 साल की सेवा पूरी मानकर पेंशन दी जाएगी, लेकिन एरियर (पिछला वेतन) नहीं मिलेगा। गौरतलब है कि यह आदेश JAG, AEC कैडर पर लागू नहीं होगा।

हालांकि, कोर्ट ने ऑपरेशनल प्रभावशीलता का हवाला देते हुए दोबारा नौकरी पर रखने का आदेश देने से इनकार कर दिया, लेकिन कहा कि यह वित्तीय लाभ देने से मना करने का आधार नहीं हो सकता।

'सेना में सिर्फ पुरुषों का एकाधिकार नहीं हो सकता'

अदालत ने कहा कि अवसरों की कमी ने महिला अधिकारियों की योग्यता और करियर की प्रगति को प्रभावित किया। उन्हें गलत तरीके से लंबी अवधि के करियर के लिए 'अनफिट' माना गया।

सेना में सिर्फ पुरुषों का एकाधिकार नहीं हो सकता। इस फैसले से उम्मीद जताई जा रही है कि सेना में महिलाओं की भागीदारी और बढ़ेगी। भर्ती और प्रमोशन सिस्टम में संरचनात्मक बदलाव होंगे। भविष्य में महिला अधिकारियों के लिए कमांड रोल्स के रास्ते भी खुल सकते हैं।

जानें SC और PC में क्या है अंतर

शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC)

भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को लंबे समय तक केवल शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के तहत ही रखा जाता था। आमतौर पर यह 10-14 साल के लिए होता था। इसके बाद सेवा जारी रखने का विकल्प सीमित होते थे।

पर्मानेंट कमीशन (PC)

जबकि पुरुष अधिकारियों को पर्मानेंट कमीशन (PC) मिलता था, जिससे वे रिटायरमेंट तक सेवा दे सकते थे। विवाद यहीं था कि पुरुषों को PC आसानी से मिलता रहा, लेकिन महिलाओं को नहीं।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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