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अस्पतालों में महिला और पुरुष डॉक्टर के लिए अलग-अलग रेस्ट रूम होना चाहिए; SC ने सुनाया बड़ा आदेश

SC on Medical Professionals: सभी अस्पतालों ने महिला और पुरुष डॉक्टर के लिए अलग-अलग रेस्ट रूम होना चाहिए। इसके लिए कुछ खास इंतजाम करने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कई सुझावों का जिक्र किया है। अदालत ने डॉक्टर की आवाजाही के लिए भी सुविधा मुहैया कराए जाने की बात कही है।

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चिकित्सा पेशेवरों के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश।

Court News: कोलकाता में महिला डॉक्टर से रेप और हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। अदालत ने इस दौरान कई अहम बिंदुओं का जिक्र किया। इसमें डॉक्टर्स के रेस्ट रूम, आवाजाही की सुविधा समेत कई मुद्दे पर ध्यान केंद्रीतल किया गया है। अपने आदेश में अदालत ने इस दौरान राष्ट्रीय टास्क फोर्स का भी गठन किया। जो वरिष्ठ और कनिष्ठ डॉक्टरों के लिए सुरक्षा उपायों के लिए पूरे देश में अपनाए जाने वाले तौर-तरीकों की सिफारिशें देगी।

अस्पतालों में होना चाहिए अलग-अलग रेस्ट रूम

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सभी अस्पतालों में महिला और पुरुष डॉक्टर के लिए अलग-अलग रेस्ट रूम होना चाहिए। इसके अलावा अदालत ने कहा कि रात 10:00 बजे से सुबह 6:00 तक डॉक्टर की आवाजाही के लिए ट्रांसपोर्टेशन सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि 'टास्कफोर्स चिकित्सा पेशेवरों की सुरक्षा, भलाई और अन्य संबंधित मामलों पर विचार करेगी। लिंग आधारित हिंसा को रोकना, इंटर्न, रेजिडेंट, नॉन रेजिडेंट डॉक्टरों के सम्मानजनक कामकाज के लिए राष्ट्रीय योजना तैयार करना होगा। कमिटी इन विषयों पर भी अपनी रिपोर्ट देगी।'

1. आपातकालीन कक्ष के क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता हो सकती है?

2. हथियारों को प्रवेश करने से रोकने के लिए बैगेज स्क्रीनिंग की आवश्यकता है।

3. यदि कोई व्यक्ति मरीज नहीं है तो उसे एक सीमा से अधिक की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

4. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा।

5. डॉक्टरों के लिए विश्राम कक्ष और डॉक्टरों, नर्सों के आराम करने के लिए लिंग तटस्थ स्थान होना चाहिए।

6. ऐसे क्षेत्रों में बायोमेट्रिक्स और चेहरे की पहचान होनी चाहिए।

7. सभी क्षेत्रों में उचित प्रकाश व्यवस्था, सभी स्थानों पर सीसीटीवी लगाना।

8. चिकित्सा पेशेवरों के लिए रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक परिवहन की व्यवस्था।

9. दुख और संकट से निपटने के लिए वर्कशॉप का आयोजन।

10. संस्थागत सुरक्षा उपायों का तिमाही ऑडिट।

11. आने वाले लोगों के अनुरूप पुलिस बल की स्थापना।

12. POSH अधिनियम चिकित्सा प्रतिष्ठानों पर लागू होता है, इसलिए ICC का गठन किया जाना चाहिए।

13. चिकित्सा व्यवसाय की आपातकालीन स्थिति के लिए हेल्पलाइन नंबर।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता पुलिस को फटकार लगाते हुए पूछा कि हजारों लोगों की भीड़ आरजी कर मेडिकल कॉलेज में कैसे घुसी। अदालत ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार को प्रदर्शनकारियों पर बल का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हा author

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रक... और देखें

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