Supreme Court News: उपभोक्ता विवादों के निपटान में देरी होने पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताते हुए देश भर में उपभोक्ता आयोगों के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। साथ ही शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग (NCDRC) के अध्यक्ष को विवादों के लंबित मामलों पर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है। यह मामला उपभोक्ता आयोगों के सदस्यों के वेतन और भत्तों से संबंधित स्वतः संज्ञान कार्यवाही के दौरान अदालत के समक्ष आया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने उपभोक्ता शिकायत निवारण व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई और इसे 'बेहद चिंताजनक' बताया।
'आयोगों के कामकाज का ऑडिट करा सकते हैं'
शीर्ष अदालत ने राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोगों के कामकाज का ऑडिट कराने की भी बात कही। उसने कहा कि इन मंचों को सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों का 'पुनर्वास केंद्र’नहीं बनना चाहिए। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र से राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग की क्षेत्रीय एवं सर्किट पीठ स्थापित करने पर विचार करने को कहा। पीठ ने कहा कि किसी उपभोक्ता को अपने मामले के लिए दिल्ली तक आने को मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि आयोग को उन तक पहुंचना चाहिए।
कोर्ट ने दो सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल करने को कहा
पीठ ने एनसीडीआरसी के अध्यक्ष से एक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा जिसमें लंबित मामलों की कुल संख्या, दाखिल शिकायतों की संख्या, मामलों के निपटारे की औसत दर, किसी लंबित मामले के निपटारे में लगने वाला संभावित समय और आयोग में सदस्यों की संख्या बढ़ाने की जरूरत के बारे में जानकारी हो। उपभोक्ता आयोगों में नियुक्तियों, सेवा शर्तों और बुनियादी ढांचे समेत उनके कामकाज की निगरानी कर रहे उच्चतम न्यायालय ने कहा कि यह रिपोर्ट दो सप्ताह में दाखिल की जाए।
अगली तारीख लगभग अगले साल की मिलती है-वकील
शीर्ष अदालत को बताया गया कि एनसीडीआरसी में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं और फिलहाल 2018-19 के मामलों की सुनवाई हो रही है। कुछ वकीलों ने पीठ को बताया कि यदि किसी मामले को इस साल जून में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया तो उसकी अगली तारीख लगभग अगले साल की मिलती है। वहीं, कुछ अन्य वकीलों ने कहा कि आमतौर पर दोपहर के भोजन के बाद के सत्र में 30 से 40 मामले सूचीबद्ध होते हैं, जिनका निपटारा नहीं हो पाता।
'लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है'
इसके बाद, पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि यदि एनसीडीआरसी में लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है तो आयोग में सदस्यों की अधिकतम संख्या बढ़ाना ही एक विकल्प है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, 'हमारे यहां उपभोक्ता हितैषी न्याय व्यवस्था है और पीठों की संख्या बढ़ाकर लंबित मामलों की संख्या कम की जा सकती है।’ शीर्ष अदालत ने हालांकि कहा कि एनसीडीआरसी के जिन आदेशों के खिलाफ उसके समक्ष अपील आती है, उनकी गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है। इससे पता चलता है कि समस्या आयोग में सदस्यों के रिक्त पदों को भरने से जुड़ी है।
