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सुप्रीम कोर्ट ने ट्रेडिंगएफएक्स घोटाले के मुख्य आरोपी की जमानत रद्द की

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश में असम के डिब्रूगढ़ के चर्चित ट्रेडिंगएफएक्स घोटाले के मुख्य आरोपी रंजीत काकोटी को मिली जमानत रद्द कर दी। यह जमानत गुवाहाटी हाईकोर्ट ने दी थी, जिसे सीबीआई ने चुनौती दी थी।

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सुप्रीम कोर्ट ने ट्रेडिंगएफएक्स घोटाले के मुख्य आरोपी की जमानत रद्द की

इस मामले की जांच सीबीआई ने असम पुलिस से 14 अक्टूबर 2024 को राज्य सरकार की सिफारिश पर अपने हाथ में ली थी। आरोप है कि रंजीत काकोटी ने इस घोटाले को अंजाम दिया, जिसमें लगभग 250 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई और करीब 1.5 लाख लोग पीड़ित हुए।

सीबीआई ने आरोपी की गिरफ्तारी के 90 दिनों की समय-सीमा में ही चार्जशीट दाखिल कर दी थी।

लेकिन गुवाहाटी हाईकोर्ट ने यह कहते हुए आरोपी को जमानत दे दी कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू हो चुकी है, इसलिए सीबीआई द्वारा आईपीसी की धारा 409 का इस्तेमाल कर डिफॉल्ट बेल अवधि 60 से 90 दिन तक बढ़ाना मान्य नहीं होगा।

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि आईपीसी की धारा 409 (जो अब BNS की धारा 316(5) के बराबर है) समय पर लगाई गई थी और इसलिए आरोपी को 90 दिन से पहले जमानत नहीं मिल सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने भी सीबीआई की इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि बीएनएस (BNS) की धारा 358(3) और बीएनएसएस (BNSS) की धारा 187(3)(i) के तहत आईपीसी और सीआरपीसी में किए गए प्रावधान नए कानून लागू होने के बाद भी मान्य रहेंगे। इसलिए हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत सही नहीं थी।

इस फैसले के साथ ही रंजीत काकोटी की जमानत रद्द कर दी गई है। सीबीआई ने इस घोटाले से जुड़े 42 एफआईआर की जांच अपने हाथ में ली थी। ज्यादातर मामलों की जांच पूरी हो चुकी है और कई आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं।

Anuj Mishra
अनुज मिश्राauthor

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले करीब दो दशकों से अनुज मिश्रा ने अपराध, आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की गहन रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है। उन्होंने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, एनआईए और खुफिया एजेंसियों से संबंधित बड़ी और संवेदनशील खबरों को नज़दीकी से कवर किया है। अनुज मिश्रा की सबसे बड़ी ताक़त उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग है। हर बड़ी और अहम खबर में वह ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद रहकर घटनाओं की प्रत्यक्ष कवरेज करते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग में जमीनी सच्चाई और तथ्य हमेशा साफ़ झलकते हैं। टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ने से पहले अनुज मिश्रा देश के कई बड़े टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी पत्रकारिता और एडिटोरियल स्किल्स से अलग पहचान बनाई। अनुज ने न केवल देश-विदेश की बड़ी खबरों को जनता तक पहुँचाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता गलियारों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखी है। उनकी पत्रकारिता शैली तथ्यपरक, इन्वेस्टिगेटिव और जमीनी हकीकत पर आधारित मानी जाती है। उन्होंने आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स सिंडिकेट, हाई-प्रोफाइल जांच और सियासी घटनाक्रमों पर कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

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