कर्नाटक की राजनीति में शुक्रवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया। कर्नाटक विधान परिषद के सभापति बसवराज होरट्टी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। होरट्टी ने दावा किया कि कांग्रेस नेताओं ने उन्हें संकेत दिया था कि उनके खिलाफ जल्द ही अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। इसी वजह से उन्होंने पहले ही अपने पद से हटने का फैसला कर लिया।
इस्तीफा देने के बाद बसवराज होरट्टी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कांग्रेस नेताओं ने उन्हें साफ तौर पर बताया था कि उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी चल रही है। उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं था। इसलिए उन्होंने स्वेच्छा से अपना इस्तीफा सौंप दिया। होरट्टी ने यह भी बताया कि इस्तीफा देने से पहले उन्होंने मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार से मुलाकात की थी।
पद छोड़ने का बनाया जा रहा था दवाब
इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री को अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा पहले ही सौंपा जा चुका है और अब यह मामला पूरी तरह समाप्त हो चुका है। साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन पर पद छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा था। बसवराज होरट्टी का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। वह लंबे समय तक जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडी(एस) से जुड़े रहे।
कर्नाटक विधानमंडल का अगला सत्र 13 अगस्त से शुरू
इसके बाद 18 मई 2022 को उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। यह बदलाव उस समय हुआ था, जब कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने में लगभग एक साल का समय बाकी था। अब होरट्टी के इस्तीफे के बाद कर्नाटक विधान परिषद के नए सभापति को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। गौरतलब है कि कर्नाटक विधानमंडल का अगला सत्र 13 अगस्त से शुरू होने वाला है। ऐसे में नए सभापति के चुनाव और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
