Jantar Mantar Protest: देशभर में नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब बड़ा सियासी रूप ले चुका है। हाल ही में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP Protest) के 'चलो संसद' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद मनीष तिवारी ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सरकार को स्पष्ट शब्दों में सलाह दी है कि किसी भी छात्र आंदोलन को अत्यधिक बल प्रयोग या दमनकारी नीतियों से दबाया नहीं जा सकता, बल्कि इसके लिए सरकार को आगे बढ़कर छात्रों से बातचीत करनी चाहिए।
एएनआई (ANI) को दिए एक खास इंटरव्यू में मनीष तिवारी ने अपने छात्र राजनीति के दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि 1988 से 1993 के बीच जब वह एनएसयूआई (NSUI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, तब 1990 में मण्डल आयोग की सिफारिशों के खिलाफ बड़ा छात्र आंदोलन हुआ था। उन्होंने कहा, "मैंने उस दौर में देखा है कि जब भी सरकारों ने अड़ियल रवैया अपनाया है, देश का बड़ा नुकसान हुआ है। बल प्रयोग करके या लाठियां चलाकर छात्रों की आवाज को कभी दबाया नहीं जा सका है। सरकार को इतिहास से सबक लेते हुए इन युवाओं तक पहुंचना चाहिए और उनसे सीधे संवाद की शुरुआत करनी चाहिए।"
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बेरोजगारी और महंगाई भी बनी वजह
मनीष तिवारी ने यह भी स्पष्ट किया कि नीट परीक्षा में हुई धांधली सिर्फ एक तात्कालिक वजह (ट्रिगर) है, लेकिन असल समस्या देश में तेजी से बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई है। युवाओं के मन में लंबे समय से जमा हो रहा गुस्सा अब इस आंदोलन के रूप में बाहर आ रहा है।
उन्होंने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि भारत की पूरी शिक्षा प्रणाली को नीचे से ऊपर तक सुधारने की जरूरत है। इसके लिए एक 'संयुक्त संसदीय समिति' (JPC) बनाई जानी चाहिए जो शिक्षा क्षेत्र की सभी चुनौतियों और कमियों की गहन जांच कर सके।
सरकार का पक्ष: बातचीत के रास्ते हमेशा खुले
दूसरी तरफ, केंद्र सरकार ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि वह छात्रों की हर समस्या का समाधान बातचीत के जरिए निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार की ओर से छात्र प्रतिनिधियों को औपचारिक बातचीत के लिए अब तक चार बार निमंत्रण भेजा जा चुका है।
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार इस मामले में किसी भी तरह के प्रतिष्ठा या अहंकार को बीच में नहीं ला रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और वे खुद छात्रों के साथ बैठक करने के लिए उपलब्ध रहेंगे। यह बैठक नड्डा के आवास या कार्यालय में आयोजित हो सकती है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पेपर लीक मामले में शामिल दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन किया जाएगा।
