क्या अदालत आंखें बंद कर ले और सब कुछ यूं ही होने दे?- डॉग लवर्स पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हो सकती है कार्रवाई
- Edited by: शिशुपाल कुमार
- Updated Jan 13, 2026, 04:10 PM IST
Stray Dog Case: आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामलों की सुनवाई के दौरान, डॉग लवर्स और उनके संगठनों पर कड़ी टिप्पणियां की हैं।
आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
Stray Dog Case: आवारा कुत्तों के हमलों से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त मौखिक टिप्पणियां कीं और सार्वजनिक सुरक्षा, जवाबदेही और डॉग लवर्स संगठनों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने खास तौर पर बच्चों और बुजुर्गों पर हो रहे हमलों को लेकर गहरी चिंता जताई।
डॉग लवर्स पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
एक नौ वर्षीय बच्चे की आवारा कुत्तों के हमले में मौत का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि जब ऐसे कुत्तों को डॉग लवर्स संगठन खाना खिला रहे हैं, तो जिम्मेदारी किसकी बनती है। अदालत ने तीखा सवाल किया, “क्या यह अदालत आंखें बंद कर ले और सब कुछ यूं ही होने दे?” पीठ ने टिप्पणी की कि भावनाएं केवल कुत्तों के लिए दिखाई देती हैं, लेकिन पीड़ितों के दर्द और जान की कीमत को नजरअंदाज कर दिया जाता है। कोर्ट ने साफ संकेत दिए कि कुत्तों के काटने से मौत या गंभीर चोट के मामलों में राज्य सरकार को भारी मुआवजा देने का आदेश दिया जा सकता है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि कुत्ते के काटने की घटनाओं के लिए कुत्ता प्रेमियों और उन्हें खाना खिलाने वालों को भी "जिम्मेदार" और "जवाबदेह" ठहराया जाएगा। न्यायमूर्ति नाथ ने कहा, ‘‘कुत्तों के काटने से बच्चों या बुजुर्गों की मृत्यु या चोट के हर मामले के लिए हम राज्य सरकारों से भारी मुआवजा देने की मांग करेंगे क्योंकि उन्होंने पिछले पांच वर्षों में नियमों के कार्यान्वयन के संबंध में कुछ नहीं किया है। साथ ही, इन आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों की भी जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की जाएगी। अगर आपको इन जानवरों से इतना प्यार है तो आप उन्हें अपने घर क्यों नहीं ले जाते? ये कुत्ते इधर-उधर क्यों घूमते हैं, लोगों को काटते हैं और डराते हैं?’’
डॉग लवर्स की तय की जा सकती है जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जवाबदेही सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रहेगी। अदालत ने कहा कि डॉग लवर्स और उनका प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों पर भी जिम्मेदारी और कानूनी दायित्व तय किया जा सकता है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर कोई कुत्तों को पालना और खिलाना चाहता है, तो उन्हें अपने घर या परिसर में रखे, सार्वजनिक जगहों पर छोड़कर उन्हें घूमने और उपद्रव करने की छूट क्यों दी जाए। न्यायमूर्ति मेहता ने न्यायमूर्ति नाथ के विचारों से सहमति जताते हुए कहा, ‘‘जब कुत्ते नौ साल के बच्चे पर हमला करते हैं तो किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए? वह संगठन जो उन्हें खाना खिला रहा है, उसे? आप चाहते हैं कि हम इस समस्या से आंखें मूंद लें।’’
अब केंद्र और राज्य सरकार का पक्ष जानेगी सुप्रीम कोर्ट
न्यायालय ने कहा कि सबसे अजीब बात यह है कि गुजरात के एक वकील को एक पार्क में कुत्ते ने काट लिया और जब नगर निगम के अधिकारी उस जानवर को पकड़ने गए, तो खुद को कुत्ता प्रेमी बताने वाले वकीलों ने नगर निगम के अधिकारियों पर हमला कर दिया। शीर्ष अदालत ने यह भी खेद जताया कि पिछले चार दिनों से वह इस मुद्दे पर दलीलें सुन रही है, लेकिन कार्यकर्ताओं और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के हस्तक्षेप के कारण वह मामलों में आगे नहीं बढ़ पाई और केंद्र तथा राज्य सरकारों के पक्ष को भी नहीं सुन सकी। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘हम सभी वकीलों से अनुरोध करते हैं कि वे हमें केंद्र, राज्य सरकारों और अन्य संबंधित निकायों की जवाबदेही तय करने दें… हमें आदेश पारित करने दें। हमें राज्यों और केंद्र के साथ आधा दिन बिताने की जरूरत है, ताकि यह देखा जा सके कि उनके पास कोई कार्ययोजना है या नहीं। समस्या हजार गुना बढ़ चुकी है। हम सिर्फ वैधानिक प्रावधानों के क्रियान्वयन की मांग कर रहे हैं। हमें यह करने दें। हमें काम करने दें। हमें आगे बढ़ने दें।’’
पिछली सुनवाई के दौरान क्या हुआ था
अदालत ने संकेत दिया कि जब इस मामले में केंद्र और राज्य सरकारों की दलीलें सुनी जाएंगी, तो उनसे बेहद गंभीर सवाल पूछे जाएंगे। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों पर कथित क्रूरता के वीडियो देखने से इनकार कर दिया था और कहा था कि वह इसे वीडियो की प्रतिस्पर्धा नहीं बनाना चाहता। कोर्ट ने यह भी कहा था कि कुत्तों द्वारा बच्चों और बुजुर्गों पर हमलों के भी वीडियो मौजूद हैं।
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