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भारत के दुश्मनों की अब खैर नहीं: स्टील्थ युद्धपोत महेंद्रगिरि नौसेना में होगा शामिल,आ गई तारीख

सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों सहित उन्नत हथियारों तथा अत्याधुनिक सेंसर प्रणाली से लैस स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत महेंद्रगिरि को 11 जुलाई को भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा।

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11 जुलाई को नौसेना में शामिल किया जाएगा स्टील्थ युद्धपोत महेंद्रगिरि (फोटो- विकीपीडिया)

भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत में 11 जुलाई को एक और बड़ा इजाफा होने जा रहा है। स्वदेशी तकनीक से निर्मित अत्याधुनिक स्टील्थ युद्धपोत 'महेंद्रगिरि'आधिकारिक तौर पर भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली आधुनिक मिसाइल प्रणालियों, उन्नत सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमता से लैस यह युद्धपोत हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक क्षमता को और मजबूत करेगा।

नौसेना के अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महेंद्रगिरि परियोजना-17ए (Project 17A) के तहत विकसित नीलगिरि श्रेणी का छठा स्टील्थ फ्रिगेट है। इसे भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो (WDB) ने डिजाइन किया है, वहीं इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) में किया गया है।

कई मोर्चों पर एक साथ लड़ने में सक्षम

बता दें कि महेंद्रगिरि को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह वायु, समुद्र और पानी के भीतर मौजूद खतरों से एक साथ मुकाबला कर सके। यह युद्धपोत एंटी-एयर, एंटी-सर्फेस और एंटी-सबमरीन ऑपरेशन चलाने में सक्षम है। इसके अलावा समुद्री सुरक्षा, लंबी दूरी की तैनाती, खोज एवं बचाव अभियान (SAR), मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) और शक्ति प्रदर्शन जैसे मिशनों में भी इसकी अहम भूमिका रहेगी।

आधुनिक हथियारों और सेंसर से लैस

इस स्टील्थ युद्धपोत में सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम,व्यापक पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली और इंटीग्रेटेड कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है। इसकी स्टील्थ डिजाइन दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान को काफी कम कर देती है, जिससे यह युद्ध के दौरान अधिक प्रभावी साबित होगा।

तेज रफ्तार और लंबी दूरी की क्षमता

महेंद्रगिरि में आधुनिक Combined Diesel or Gas (CODOG) प्रणोदन प्रणाली लगाई गई है। यह तकनीक जहाज को आवश्यकता के अनुसार तेज गति और लंबी दूरी तक लगातार ऑपरेशन करने की क्षमता देती है। इसके साथ ही इसमें उच्च स्तर की ऑटोमेशन तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया है, जिससे कम चालक दल के साथ अधिक प्रभावी संचालन संभव हो सकेगा।

'आत्मनिर्भर भारत' की बड़ी सफलता

भारतीय नौसेना के अनुसार, महेंद्रगिरि में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इसके निर्माण में देशभर के कई उद्योगों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) ने योगदान दिया है। इससे न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ी है बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया नाम

इस युद्धपोत का नाम पूर्वी घाट की महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया है। नौसेना के मुताबिक यह नाम दृढ़ता, शक्ति और अडिग संकल्प का प्रतीक है। यह युद्धपोत भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पहले ही नौसेना को सौंपा जा चुका है जहाज

महेंद्रगिरि को 30 अप्रैल को मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने भारतीय नौसेना को सौंप दिया था। अब 11 जुलाई को इसे औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा। इससे पहले 21 जून को नीलगिरि श्रेणी का पांचवां स्टील्थ युद्धपोत दुनागिरी भी भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। महेंद्रगिरि के शामिल होने के साथ ही परियोजना-17ए के तहत भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण अभियान को नई गति मिलेगी और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के साथ हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक बढ़त और मजबूत होगी।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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