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'नए घर के पैसे कहां से आए?' राम मंदिर चंदा चोरी मामले में SIT ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव से फिर की पूछताछ

Ram Mandir Donation Row: अयोध्या के राम मंदिर में हुए कथित घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही एसआईटी ने शुक्रवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव से दूसरी बार लंबी पूछताछ की। इस बार जांच का मुख्य फोकस तीनों की निजी संपत्तियों और आय के स्रोतों पर रहा।

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राम मंदिर चढ़ावा जांच (Photo: AI Image)

Ram Mandir Donation Row: राम मंदिर के चढ़ावे और जमीनों की खरीद-फरोख्त में लगी वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। मामले की तफ्तीश में जुटी विशेष जांच टीम (SIT) ने शुक्रवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय (SIT Interrogates Champat Rai), ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव को तलब कर दूसरी बार लंबी पूछताछ की।

सूत्रों के अनुसार, इस बार जांच टीम ने केवल ट्रस्ट (ram mandir chanda chori) के खातों पर ही नहीं, बल्कि इन तीनों पदाधिकारियों की निजी आय पर भी ध्यान केंद्रित किया। जांच एजेंसी ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव से उनकी चल और अचल संपत्ति का पूरा ब्योरा मांगा है। एसआईटी ने इन तीनों से जुड़े सभी संपत्ति दस्तावेजों को जल्द से जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

मांगे निजी संपत्ति के दस्तावेज

सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम इस बात की पड़ताल कर रही है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान अनिल मिश्रा और गोपाल राव की निजी संपत्तियों में जो कथित तौर पर भारी बढ़ोतरी हुई है, उसका असली आधार और आय का स्रोत क्या है। इस दौरान अनिल मिश्रा से विशेष रूप से उनके नए आलीशान आवास और उसे बनाने के लिए आए वित्तीय संसाधनों को लेकर कड़ी पूछताछ की गई।

बैंक अधिकारियों से तीखे सवाल

एसआईटी की रडार पर सिर्फ ट्रस्ट के अधिकारी ही नहीं, बल्कि बैंक के कर्मचारी भी आ गए हैं। शुक्रवार को ही जांच टीम ने मंदिर के चढ़ावे की नकदी गिनने वाले कर्मचारियों और संबंधित बैंक अधिकारियों से पूछताछ की। एसआईटी ने बैंक अधिकारियों से पूछा कि ट्रस्ट और बैंक के बीच तय की गई नियमों की व्यवस्था का पालन क्यों नहीं किया गया?

जब एक निजी सुरक्षा एजेंसी को केवल सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था, तो उनके गार्ड्स से कैश गिनने जैसा संवेदनशील काम क्यों कराया गया? अगर बैंक को इस स्तर पर कोई भी गड़बड़ी का शक था, तो उन्होंने अपने उच्च अधिकारियों को सूचित क्यों नहीं किया?

जांच के दायरे को और बढ़ाने के लिए एसआईटी ने ट्रस्ट की सालाना ऑडिट रिपोर्ट और सभी वित्तीय रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं। सूत्रों का कहना है कि जांच टीम इन खातों का दोबारा परीक्षण कराने पर भी विचार कर रही है। एसआईटी जल्द ही बैंक कर्मचारियों की भूमिका को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने वाली है, जिसके बाद कुछ और बड़ी कार्रवाइयां देखने को मिल सकती हैं।

Vinod Mishra
विनोद मिश्राauthor

दिल्ली से लेकर यूपी की राजधानी लखनऊ में करीब दो दशक से टीवी पत्रकारिता कर रहें है। यूपी की सियासत की नब्ज और ब्यूरोकेसी की समझ है। पत्रकारिता एक पैशन है।

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