पश्चिम बंगाल में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) पर सियासी रार जारी है। सीएम ममता बनर्जी लगातार इस प्रक्रिया की खिलाफत कर रही हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने दो टूक कहा कि यह प्रक्रिया तो होकर रहेगी।
इसी बीच बीजेपी के दिग्गज नेता पश्चिम बंगाल में टीएमसी द्वारा SIR के विरोध पर भाजपा सांसद रवि किशन ने कहा,"वे विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वहाँ (पश्चिम बंगाल) सबसे ज्यादा फर्जी वोटर हैं, वहां बांग्लादेशी ज्यादा हैं। वो (ममता बनर्जी) क्यों डर रही हैं? SIR का काम पारदर्शिता से होना चाहिए। बिहार में 65 लाख फर्जी वोटर मिले हैं, वहां (पश्चिम बंगाल) 1 करोड़ से ज्यादा फर्जी वोटर मिलेंगे।"
SIR के खिलाफ क्यों है TMC?
टीएमसी का आरोप है कि SIR को ऐसे समय पर आगे बढ़ाया जा रहा है जब चुनाव में कुछ ही महीने बचे हैं। पार्टी का दावा है कि यह प्रक्रिया विपक्षी वोट कम करने और टीएमसी के मजबूत इलाकों को निशाना बनाने की कोशिश है।
सीधे तौर पर समझें तो राज्य की लगभग 100 विधानसभा सीटें मुस्लिम और शरणार्थी आबादी वाले इलाकों में हैं। ये सीटें पिछले पंद्रह वर्षों से ममता बनर्जी की चुनावी ताकत का केंद्र रही हैं।
SIR की वजह से अगर इन इलाकों में बड़ी संख्या में नाम हटते हैं, तो टीएमसी की पूरी चुनावी गणित हिल सकती है।
23 सालों में बंगाल के 10 जिलों में दोगुनी हुई आबादी
हाल ही में बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक डाटा शेयर करते हुए 'एक्स' पर पोस्ट किया। पोस्ट के जरिए उन्होंने दावा किया कि 2002 में जब भारत के चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अंतिम बार आयोजित किया गया था, और 2025 के बीच पश्चिम बंगाल में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या में 66% की वृद्धि देखी गई है। राज्य में मतदाताओं की संख्या 4.58 करोड़ से बढ़कर 7.63 करोड़ हो चुकी है।
