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Sikh for Justice नेता हरदीप निज्जर की कनाडा में गोली मारकर हत्या, खालिस्तान आंदोलन को दे रहा था हवा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 19, 2023, 10:53 AM IST

Hardeep Nijjar shot Dead: सिख फॉर जस्टिस के नेता हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में गोली मारकर हत्या कर दी गई है।

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हरदीप निज्जर की गोली मारकर हत्या

Hardeep Nijjar shot Dead: सिख फॉर जस्टिस के नेता हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में गोली मारकर हत्या कर दी गई है। वह भारत में कई मामलों में वांछित था। भारत सरकार ने कनाडा से उसके प्रत्यपर्ण की मांग की थी। जानकारी के मुताबिक, कनाडा के सरी में गुरुद्वारा साहिब में हुई गोलीबारी में निज्जर की मौत हुई है। नेशनल इन्वेस्टिंग एजेंसी (NIA)ने उसके सिर पर 10 लाख रुपये का इनाम रखा था।

निज्जर को देश में हिंसा और आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के कारण भारत सरकार द्वारा वांछित आतंकवादी घोषित किया गया था। हाल ही में उसका नाम भारत सरकार द्वारा जारी की गई 40 आतंकवादियों की एक सूची में भी शामिल किया गया था। 2022 में, एनआईए ने पंजाब के जालंधर में एक हिंदू पुजारी की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाने के बाद निज्जर पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। पुजारी की हत्या की साजिश खालिस्तान टाइगर फोर्स (केटीएफ) ने रची थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरदीप निज्जर केटीएफ का प्रमुख था।

जांच में जुटी एजेंसियां

निज्जर की मौत के बाद भारतीय एजेंसियां कनाडाई एजेंसियों के साथ इस वारदात की जांच में जुटी हैं। सूत्रों की मानें तो निज्जर कनाडा में रहकर भारत के खिलाफ खालिस्तानी आंदोलन को हवा दे रहा था। बता दें, निज्जर के दो सहयोगियों को इससे पहले फिलीपींस और मलेशिया में गिरफ्तार किया गया था।

चार दिन पहले एक और खालिस्तानी नेता की हुई थी मौत

इससे पहले 15 जून को खालिस्तानी नेता और वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह के करीबी अवतार सिंह खांडा की भी लंदन में मौत हो गई थी। उसकी मौत का कारण ब्लड कैंसर बताया गया था। बीते कुछ दिनों से अवतार सिंह खांडा अस्पताल के आईसीयू में भर्ती था। बता दें, लंदन में भारतीय दूतावास के बाहर लगा तिरंगा उतारने में भी अवतार सिंह खांडा का ही हाथ था। इस आरोप में उसे गिरफ्तार भी किया गया था। खांडा का पूरा परिवार खालिस्तानी आंदोलन से जुड़ा हुआ था। एनआईएन ने खांडा के भी प्रत्यर्पण की मांग की थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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