Shubhanshu Shukla Message from space: अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की तरफ बढ़ रहे भारत के शुभांशु शुक्ला अपने इस मिशन को लेकर बेहद खुश और उत्साहित हैं। स्पेस से किए अपने पहले कॉल में उन्होंने कहा कि 'वैक्यूम में रहना उनके लिए एक अलग तरह का अनुभव है। यह शानदार और जादुई है।' भारतीय वायु सेना में ग्रुप कैप्टन ने कहा कि 'एक बहुत ही छोटे बच्चे की तरह वैक्यूम में कदम बढ़ाना और खुद को नियंत्रित बच्चे करना सीख रहे हैं।' शुक्ला ने कहा कि उनका स्पेस में आना व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामूहिक उपलब्धि है।
एक बेबी की तरह जीरो ग्रैविटी में चलना सीख रहा हूं-शुभांशु
शुभांशु ने कहा, 'जीरो गैविटी में कैसे रहा जाता है, एक बेबी की तरह कैसे चलना और खुद को कैसे नियंत्रित करना है, इसे सीख रहा हूं। इन सारी चीजों का मैं बहुत लुत्फ उठा रहा हूं।' शुक्ला ने कहा कि उनके साथ अंतरिक्ष यात्रियों का कहना है कि वह बहुत सो रहे हैं। यह कहने के बाद शुभांशु और उनके साथी हंसने लगे। शुभांशु ने कहा कि ज्यादा सोना स्वस्थ होने का लक्षण माना जाता है। अपने इस कॉल में भारतीय वायु सेना के अधिकारी ने कहा कि उनका यह मिशन भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम और गगनयान मिशन के लिए एक बड़ा कदम है।
'आप सभी इस यात्रा में मेरे साथ हैं'
उन्होंने कहा, 'भारतीय तिरंगे को देखकर मुझे यह एहसास हुआ कि आप सभी इस यात्रा में मेरे साथ हैं। यह भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम और आगामी गगनयान मिशन की दिशा में एक मजबूत कदम है। मैं चाहता हूं कि आप में से हर कोई इस मिशन का हिस्सा महसूस करे। यह केवल तकनीकी महत्वाकांक्षा की बात नहीं है, बल्कि इस पूरी यात्रा के पीछे की भावना और उद्देश्य की बात है। अगले 14 दिनों में, मेरा लक्ष्य कुछ महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करना और अपने अनुभवों को रिकॉर्ड करना है, ताकि मैं उन्हें आप सभी के साथ साझा कर सकूं।'
418 किलोमीटर ऊंचाई से दिखने वाला दृश्य साझा किया
शुक्ला ने अंतरिक्ष यान से पृथ्वी की 418 किलोमीटर ऊंचाई से दिखने वाला दृश्य साझा किया और उसे 'सुंदर' बताया। बुधवार को शुक्ला एक ऐतिहासिक यात्रा पर अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की ओर रवाना हुए, जो भारत की 41 वर्षों के बाद मानव अंतरिक्ष उड़ान में वापसी का प्रतीक है। एक्सिऑम-4 वाणिज्यिक मिशन का नेतृत्व कमांडर पैगी व्हिटसन कर रही हैं, जिसमें शुक्ला मिशन पायलट हैं और हंगरी के अंतरिक्ष यात्री टिबोर कपू व पोलैंड के स्लावोज उज्नान्स्की-विस्नीव्स्की मिशन विशेषज्ञ हैं।
लगातार टलता रहा मिशन
इस मिशन के तहत प्रक्षेपण मूलतः 29 मई को होना था लेकिन फाल्कन-9 रॉकेट के बूस्टर में तरल ऑक्सीजन के रिसाव और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के पुराने रूसी मॉड्यूल में भी रिसाव होने का पता चलने के बाद पहले इसे आठ जून, फिर 10 जून और फिर 11 जून के लिए टाल दिया गया। इसके बाद प्रक्षेपण की योजना फिर 19 जून के लिए टाल दी गई और फिर नासा द्वारा रूसी मॉड्यूल में मरम्मत कार्यों के बाद कक्षीय प्रयोगशाला के संचालन का आकलन करने के लिए प्रक्षेपण की तिथि 22 जून तय की गई।
