Sharad Pawar :महाराष्ट्र की सियासत से बड़ी खबर आई है। शरद पवार ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। पवार ने खुद इसकी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वह राकांपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहे हैं। पवार के इस्तीफे की घोषणा के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़नी तय है। पवार के भतीजे अजीत पवार के भाजपा के साथ मिलकर सरकार में शामिल होने की अटकलें और जोर पकड़ सकती हैं।
इस्तीफे की घोषणा सुनकर कार्यकर्ता दंग हुए
अपनी आत्मकथा 'लोक माझे संगाती' के दूसरे संस्करण के विमोचन के मौके पर पवार ने कहा, 'मैंने एनसीपी के अध्यक्ष पद से हटने का फैसला किया है।' अचानक पवार के इस्तीफे की घोषणा सुनकर वहां कार्यक्रम में मौजूद एनसीपी के नेता एवं कार्यकर्ता दंग रह गए। उन्हें इस बात की जरा भी उम्मीद नहीं थी कि पवार अपने पद से इस्तीफे की घोषणा करेंगे। पवार का फैसला सभी को हैरान कर गया। हालांकि, एनसीपी के कई नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने पद से हटने के उनके फैसले का विरोध किया।
सार्वजनिक जीवन से रिटायर नहीं हो रहा-पवार
देश एवं महाराष्ट्र के कद्दावर नेता ने कहा कि वह आगे कोई भी चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि दशकों की राजनीति करने के बाद एक समय ऐसा आता है कि जब व्यक्ति को सोचना पड़ता है कि उसे कहां रुकना है। उन्होंने कहा, 'मेरा राज्यसभा में तीन वर्षों का कार्यकाल अभी बचा हुआ है। अब मैं कोई चुनाव नहीं लड़ूंगा। मैं इन तीन वर्षों में राज्य एवं देश से जुड़े मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित करूंगा। मैं कोई अन्य अतिरिक्त जिम्मेदारी नहीं लूंगा।' हालांकि, पवार ने संकेत दिया कि वह राजनीति से संन्यास नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा, 'साथियो, हालांकि मैं पार्टी के अध्यक्ष पद से हट रहा हूं लेकिन मैं सार्वजनिक जीवन से रिटायर नहीं हो रहा हूं।'
समिति करेगी पार्टी के भविष्य पर फैसला
पवार ने कहा कि पार्टी की भविष्य की योजना पर फैसला लेने के लिए एक समिति बनाने की जरूरत है। इस समिति में प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे, पीसी चाको, नरहरि जिरवाल, अजीत पवार, सुप्रिया सुले, जयंत पाटील, छगन भुजबल, दिलीप वलसे पाटील, अनिल देशमुख, राजेश टोपे, जितेंद्र अवहाद, हसन मुशरिफ, धनंजय मुंडे, जयदेव गायकवाड़ और राकांपा की इकाइयों के प्रमुख शामिल होंगे।
एनसीपी नेताओं-कार्यकर्ताओं ने फैसले का विरोध किया
इस्तीफा की घोषणा सुनते ही वहां मौजूद राकांपा नेता एवं कार्यकर्ता खड़े हो गए और उनसे इस फैसले को वापस लेने की मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे। एक नेता ने कहा, 'हम साहब के इस फैसले को स्वीकार नहीं करते हैं। हमारा विनम्र अनुरोध है कि आप अपना फैसला वापस लें। जब तक आप अपना फैसला वापस नहीं लेंगे, हम यहां से हिलेंगे नहीं।'
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