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'ऑपरेशन सिंदूर' पर संसद के विशेष सत्र की जगह सर्वदलीय बैठक के पक्ष में शरद पवार, कांग्रेस को झटका

'ऑपरेशन सिंदूर' पर संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने को लेकर विपक्ष में मतभेद सामने आने लगे हैं। शरद पवार ने कहा है कि देश के व्यापक हित को देखते हुए इस गंभीर मसले की चर्चा सर्वदलीय बैठक में होनी चाहिए। हालांकि, वह विशेष सत्र बुलाने के खिलाफ नहीं हैं।

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सर्वदलीय बैठक बुलाना चाहती है कांग्रेस।

Sharad Pawar : पहलगाम आतंकवादी हमले और 'ऑपरेशन सिंदूर' पर चर्चा के लिए कांग्रेस और शिवसेना जहां संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रही हैं, वहीं, उनके सहयोगी दल एनसीपी-एसपी के अध्यक्ष शरद पवार का रुख अलग है। पवार संसद के विशेष सत्र की जगह सर्वदलीय बैठक चाते हैं। पवार ने कहा कि 'संसद का विशेष सत्र बुलाने के विचार के खिलाफ वह नहीं हैं लेकिन संवेदनशील और राष्ट्रिय हित के गंभीर मसलों की चर्चा संसद में सार्वजनिक रूप से नहीं होनी चाहिए।' दरअसल, विपक्ष की कई पार्टियां हैं जो संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने के पक्ष में हैं। पवार ने मीडिया से बातचीत में मंगलवार को कहा कि देश के व्यापक हित में यह उचित होगा कि सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए ताकि संवेदनशील मुद्दों की गोपनीयता बरकरार रहे।

पवार के बयान पर प्रतिक्रिया नहीं दूंगा-रमेश

पवार के इस बयान के बारे में जब कांग्रेस नेता जयराम रमेश से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह उनके बयान पर प्रतिक्रिया नहीं देंगे। लेकिन विपक्ष की सभी पार्टियां चाहती हैं कि एक सर्वदलीय बैठक हो जिसमें प्रधानमंत्री उपस्थित रहें। उन्हें हमारी बातों को सुनना और हमारे सवालों का जवाब देना चाहिए। यही नहीं संसद का विशेष सत्र भी बुलाया जाना चाहिए।

ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान युद्ध पर घोषणा क्यों की?

कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से ही 'ऑपरेशन सिंदूर' का समर्थन करती आ रही है लेकिन हैरान करने वाली बात है कि पीएम मोदी की घोषणा से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर दिया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवा दिया है। अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में पीएम ने इस बारे में कुछ नहीं कहा। पीएम को कई सारे सवालों का जवाब देना है। हम चाहते हैं कि पीएम सर्वदलीय बैठक बुलाएं। हम यह भी जानना चाहते हैं ट्रंप सारी घोषणाएं क्यों कर रहे हैं?

क्या पहलगाम हमले की आकलन कराएगी सरकार?

रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि 'करगिल युद्ध समाप्त होने के ठीक तीन दिन बाद तब की वाजपेयी सरकार ने 29 जुलाई 1999 को करगिल समीक्षा समिति गठित की थी। इसकी रिपोर्ट 23 फरवरी, 2000 को संसद में प्रस्तुत की गई थी। हालांकि इसके कुछ हिस्सों को अब भी गोपनीय रखा गया है और ऐसा होना भी चाहिए।' उन्होंने कहा कि इस समिति के अध्यक्ष भारत के सामरिक मामलों के विशेषज्ञ के. सुब्रमण्यम थे, जिनके पुत्र एस जयशंकर वर्तमान में भारत के विदेश मंत्री हैं। रमेश ने सवाल किया कि क्या मोदी सरकार अब पहलगाम हमले को लेकर एनआईए की जांच के बावजूद इसी तरह का एक स्वतंत्र और व्यापक विश्लेषण एवं आकलन कराएगी?

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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