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फिलहाल नहीं खुलेगा शंभू बॉर्डर! सुप्रीम कोर्ट में 12 अगस्त को अगली सुनवाई, जानें खास बातें

SC on Shambhu border: शंभू बॉर्डर खोलने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शक्रवार को भी सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत में हरियाणा की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा। अदालत ने कहा पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों को समाधान करना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी।

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सुप्रीम कोर्ट।

Court News: पंजाब और हरियाणा सरकार के बीच शंभू बॉर्डर को लेकर छिड़ा विवाद सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर है। शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई हुई। अदालत में हरियाणा की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए और उन्होंने अदालत से एक्सपर्ट का नाम फाइनल करने के लिए समय मांगा और सुनवाई टालने की अपील की। मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी।

शंभू बॉडर पर बरकरार रहेगी यथास्थिति

सर्वोच्च अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दोनों राज्य (पंजाब और हरियाणा) सरकार हमारे सुझाव पर विचार कर के हमें बताएं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों राज्यों को समाधान करना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी। तब तक शंभू बॉडर पर यथास्थिति बरकरार रहेगी।

हरियाणा वे सुनवाई टालने की अपील की

हरियाणा की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक एक्सपर्ट का नाम देने को कहा था जो सरकार और आंदोलनकारी किसानो से बात कर सके। अभी नाम फाइनल करने में समय लग रहा है, इसलिए शुक्रवार तक सुनवाई टाल दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को कहा की लोकतंत्र में अपनी बात को कहने का सबको अधिकार है।

हमें एक सप्ताह का समय दें- तुषार मेहता

हरियाणा सरकार ने कहा कि कोर्ट में किसानों की तरफ से कोई पक्ष नहीं है। न ही पंजाब हाई कोर्ट में था और न ही सुप्रीम कोर्ट में, एसजी तुषार मेहता ने कहा कि हम चर्चा करने और एक समिति गठित करने के लिए तैयार हैं। हमें एक सप्ताह का समय दें। सॉलिसिटर जनरल ने कहा इस सबका समाधान बॉर्डर को खोलना है।

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास कुछ अच्छे सुझाव हैं, मान लीजिए कि अगर कोई एम्बुलेंस या वरिष्ठ नागरिकों को लेकर कोई कार आ रही है, तो वे पैदल नहीं जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्य सरकारों से नाम मांगे जो किसानों के साथ बात करेंगे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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