Sanjeev Jiva Murder Case: कहते हैं जिस गोली से आप दूसरों को शिकार बनाते है, वहीं गोली कभी ना कभी आती है। 2005 में बीजेपी के विधायक रहे कृष्णानंद राय हत्याकांड में संजीव जीवा भी शामिल था। संजीव जीवा इतना खूंखार निकला कि उसने कार की बोनट पर चढ़कर गोलियां मारी थीं साथ ही में शिखा काट कर मुख्तार को भेंट किया था। लेकिन 18 साल बाद उसका भी अंत कुछ वैसे ही हुआ। लखनऊ की एससी-एसटी कोर्ट में अंधाधुंध फायरिंग में उसे बदमाशों ने मार डाला। इस मामले में विजय यादव का नाम सामने आया है, हालांकि कुछ और लोगों के शामिल होने की बात कही जा रही है। इन सबके बीच संजीव जीवा की पत्नी पायल माहेश्वरी ने खुद को गिरफ्तार नहीं किए जाने की अर्जी सुप्रीम कोर्ट में लगाई है। उसने अपने हत्या की आशंका जताई है।
संजीव जीवा का आपराधिक सफर
संजीव जीवा मूल तौर पर यूपी के शामली का रहने वाला था और दूध की व्यापार किया करता था। हालांकि उसका परिवार बाद में मुजफ्फरनगर शिफ्ट हो गया। मुजफ्फरनगर में भी वो दूध का व्यापार करता था। लेकिन बाद में दवा की दुकान पर काम करने लगा और अपने ही मालिक का अपहरण किया। लेकिन उसका नाम 1997 में तब सुर्खियों में आया जब उसने फर्रुखाबाद के कद्दावर बीजेपी नेता और मंत्री रहे ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या की। उस केस में वो आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा था। लेकिन मुख्तार अंसारी ने उसकी जमानत कराई और खुद के गैंग में शामिल कर लिया। मुख्तार अंसारी के कहने पर उसने बीजेपी के विधायक रहे कृष्णानंद राय की हत्या की हालांकि सबूतों के अभाव में उसे सीबीआई कोर्ट ने बरी कर दिया था।
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