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राहुल गांधी की राह पर तेजस्वी, करेंगे 'बिहार यात्रा', आरक्षण के मुद्दे पर जदयू को घेरने का प्लान

Tejashwi Yadav Bihar Yatra: बिहार विधानसभा में नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने 15 अगस्त के बाद प्रदेश की यात्रा पर निकलने की घोषणा की है। हालांकि, अभी इस यात्रा को लेकर कोई कार्यक्रम तय नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि यात्रा के दौरान राजद आरक्षण के मुद्दे को जोरशोर से उठाएगी।

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तेजस्वी यादव।

Tejashwi Yadav Bihar Yatra: राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की तर्ज पर राजद नेता तेजस्वी यादव भी बिहार यात्रा निकालने जा रहे हैं। इस प्रदेश यात्रा के पहले राजद विभिन्न मुद्दों को धार देने में जुटी है। सूत्रों की मानें तो विपक्षी पार्टी आरक्षण जैसे मुद्दे को लेकर बिहार की जनता के बीच जा रही है और लगातार सत्ताधारी एनडीए को घेरने का काम कर रही है। बिहार विधानसभा में नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने 15 अगस्त के बाद प्रदेश की यात्रा पर निकलने की घोषणा की है। हालांकि, अभी इस यात्रा को लेकर कोई कार्यक्रम तय नहीं हुआ है।

ऐसा माना जा रहा है कि इस 'बिहार यात्रा' के दौरान तेजस्वी यादव सत्ता पक्ष को विभिन्न मुद्दों पर घेरेंगे। इसमें आरक्षण के साथ-साथ कानून व्यवस्था और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने का मुद्दा सबसे ऊपर होगा। ऐसा कहा जा रहा है कि तेजस्वी अपनी बिहार यात्रा में इन दोनों मुद्दों को प्रमुखता से लेकर लोगों के बीच जाएंगे। भ्रष्टाचार के मामले भी विपक्ष को तलाशने की जरूरत नहीं है। बारिश के दिनों में लगातार पुलों का धराशायी होना विपक्ष को बड़ा मुद्दा दे दिया है।

आरक्षण के मुद्दे पर घेरेगी राजद

बिहार में जाति आधारित गणना के बाद सरकार ने आरक्षण की सीमा बढ़ा दी थी। जातिगत जनगणना से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर महागठबंधन सरकार ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण की सीमा 16 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए 1 से बढ़ाकर 2 प्रतिशत, अत्यंत पिछड़ी जाति के लिए 18 से बढ़ाकर 25 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 15 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत की थी। इस तरह जाति आधारित आरक्षण की कुल सीमा 50 से बढ़कर 65 प्रतिशत हो गई। अलग से सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। इसके बाद मामला अदालत में पहुंच गया और पटना उच्च न्यायालय ने इस पर रोक लगा दी। पटना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ बिहार सरकार सर्वोच्च न्यायालय पहुंची।

बिहार को स्पेशल स्टेशन की मांग

वहीं, केंद्र सरकार ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने से साफ मना कर दिया है। हालांकि, बिहार के लिए केंद्रीय बजट में बड़ी राशि का प्रावधान कर केंद्र सरकार ने इस मांग के असर को काफी हद तक कम किया है, लेकिन यह मुद्दा अब भी जिंदा है। माना जा रहा है कि तेजस्वी इस मुद्दे को भी अपने दौरे के क्रम में उठाएंगे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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