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लालू को जमानत मिलते ही समर्थक बांटने लगे मिठाई, भाजपाइयों से हो गई जूतम पैजार

  • Written by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 15, 2023, 01:28 PM IST

राजद समर्थक जैसे ही मिठाई खिलाने भाजपा नेताओं के पास पहुंचे तो उन्होंने इसका विरोध किया। इसके बाद राजद नेताओं से उनकी कहासुनी भी हो गई, मामला इतना बढ़ गया कि देखते ही देखते दोनों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई।

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बिहार विधानसभा के बाहर भाजपा व राजद समर्थकों में हाथापाई

Photo : ANI

Bihar assembly: जमीन के बदले नौकरी मामले में लालू परिवार को दिल्ली के राउज एवेन्यु कोर्ट से राहत मिलते ही उनके समर्थक बिहार में खुशी मनाने लगे। कोर्ट ने जैसे ही लालू यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती समेत सभी आरोपियों को जमानत दी, समर्थकों ने बिहार में मिठाई बांटना शुरू कर दिया। समर्थक इतना खुश हुए कि मिठाई खिलाने भाजपाइयों के पास तक चले गए, फिर क्या भाजपा के लोगों को यह बात रास नहीं आई और दोनों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई।

दरअसल, पूरा मामला बिहार विधानसभा के बाहर का है, जहां भाजपा विधायक प्रदर्शन कर रहे थे। इस बीच जैसे ही खबर आई कि लालू यादव समेत सभी आरोपियों को कोर्ट से जामनत मिल गई है, राजद समर्थक खुशी मनाने लगे। आनन-फानन मिठाई भी मंगा ली गई और एक-दूसरे को खिलाने भी लगे। इस दौरान कुछ राजद समर्थक विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर रहे भाजपा नेताओं के पास पहुंच गए और उन्हें मिठाई की पेशकश की। इसके बाद मामला बिगड़ गया।

हाथापाई की आई नौबत

राजद समर्थक जैसे ही मिठाई खिलाने भाजपा नेताओं के पास पहुंचे तो उन्होंने इसका विरोध किया। इसके बाद राजद नेताओं से उनकी कहासुनी भी हो गई, मामला इतना बढ़ गया कि देखते ही देखते दोनों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय कुमार सिन्हा का कहना है कि सभी भाजपा विधायक विधानसभा के बाहर थे, जबकि राजद के लोग अंदर थे। हालांकि, राजद नेताओं ने बाहर आकर गुंडागर्दी शुरू कर दी, लड्डू खिलाने के बहाने वे धक्का-मुक्की करने लगे, जिससे मामला बिगड़ गया। उन्होंने कहा, वह इस मामले को राज्यपाल के सामने उठाएंगे।

क्या है नौकरी के बदले जमीन घोटाला

यूपीए सरकार में 2004 से 2009 के बीच लालू यादव सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि इस दौरान रेलवे में नौकरी के बदले उम्मीदवारों से जमीनें हड़पी गईं। नौकरी दिलाने के नाम पर उनकी जमीनों को दूसरों के नाम करवा लिया गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि यह जमीनें बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और लालू यादव की बेटी मीसा भारती के नाम लिखवाई गईं। सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की थी। बीते साल अक्टूबर 2022 में सीबीआई ने चार्जशीट भी दाखिल की थी, जिसका संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने लालू यादव समेत 14 आरोपियों को तलब किया था।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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