Malegaon Blast Case : महाराष्ट्र एंटी-टेरर स्क्वॉड (ATS) के पूर्व अधिकारी ने 2008 के मालेगांव बम धमाके मामले में सनसनीखेज खुलासा किया है। अधिकारी का दावा है कि उसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के चीफ मोहन भागवत को गिरफ्तार करने के लिए कहा गया था। नवभारत टाइम्स से खास बातचीत में पूर्व अधिकारी महबूब मुजावर ने कहा कि 'मालेगांव ब्लास्ट में भागवत टार्गेट पर थे। उन्हें इस मामले में फंसाने की कोशिश हुई। उस समय कोई भगवा आतंकवाद नहीं था, सब फर्जी था।'
मालेगांव ब्लास्ट केस में 31 जुलाई को आया फैसला
बता दें कि गुरुवार को ही मालेगांव बम ब्लास्ट केस में बड़ा फैसला आया। NIA की स्पेशल कोर्ट ने इस केस में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित समेत सभी 7 आरोपियों को बरी कर दिया है। करीब 17 साल बाद आए इस फैसले को लेकर कांग्रेस और बीजेपी में जुबानी जंग चल रही है। इस बम धमाके में छह लोगों की जान गई थी और करीब 100 लोग घायल हुए थे।
''भगवा आतंकवाद' की थ्योरी को स्थापित करना चाहते थे'
मालेगांव ब्लास्ट केस में फैसला आने के बाद पूर्व इंस्पेक्टर मुजावर ने कहा कि उन्हें संघ के प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने के लिए कहा गया था। यह उस समय रिकॉर्ड पर था। भागवत को गिरफ्तार करने का मकसद 'भगवा आतंकवाद' की थ्योरी को स्थापित करना था लेकिन अब एनआईए कोर्ट के फैसले ने एक फर्जी अधिकारी द्वारा की गई फर्जी जांच को उजागर कर दिया है।'
मुझे फर्जी केस में फंसाकर जेल भेजा-पूर्व इंस्पेक्टर
मुजावर ने आगे कहा कि 'मैं यह नहीं कह सकता कि एटीएस ने उस समय क्या जांच की और क्यों लेकिन मुझे राम कलसांगरा, संदीप डांगे, दिलीप पाटीदार और भागवत जैसी हस्तियों के बारे में कुछ गोपनीय आदेश दिए गए थे। ये सभी आदेश ऐसे नहीं थे कि उनका पालन किया जा सके।' पूर्व इंस्पेक्टर ने कहा कि 'मेरा 40 साल का कैरियर बर्बाद कर दिया। मैंने आदेश का पालन नहीं किया और मोहन भागवत को गिरफ्तार नहीं किया क्योंकि उन्हें हकीकत पता थी। मुजावर ने बताया, मोहन भागवत जैसी बड़ी हस्ती को पकड़ना मेरी क्षमता से परे था। चूंकि मैंने आदेशों का पालन नहीं किया, इसलिए मेरे खिलाफ झूठा मामला दर्ज कर मुझे जेल भेज दिया गया। इस मामले ने मेरे 40 साल के करियर को बर्बाद कर दिया। कोई भगवा आतंकवाद नहीं था। सब कुछ फर्जी था।'
