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राजस्थानी छटा से मोर पंख तक, पीएम मोदी के साफे में भारत की झलक; हर साल की तरह इस बार भी रहा दिखा खास अंदाज

अपने पहले कार्यकाल से ही गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर अपनी वेशभूषा को लेकर प्रधानमंत्री सुर्खियां बटोरते रहे हैं। इससे पहले, पीएम मोदी ने 76वें गणतंत्र दिवस पर सफेद कुर्ता-पायजामा के साथ गहरे भूरे रंग का बंद गले का कोट और लाल-पीले रंग का साफा पहना था। प्रधानमंत्री मोदी ने 75वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर बहुरंगी ‘बांधनी’ प्रिंट का साफा पहना था।

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पीएम मोदी का जुदा अंदाज।

77वें गणतंत्र दिवस के भव्य अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर अपनी विशिष्ट पारंपरिक वेशभूषा को लेकर चर्चा में रहे। विशिष्ट राष्ट्रीय अवसरों पर रंग-बिरंगे और प्रतीकात्मक साफे पहनने की अपनी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने इस बार सुनहरे रंग की कढ़ाई से सजा, गहरे मरून रंग का आकर्षक साफा धारण किया। साफे पर मोर पंख की आकृति की कढ़ाई की गई थी, जो भारतीय संस्कृति में सौंदर्य, गरिमा और गौरव का प्रतीक मानी जाती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस साफे के साथ सफेद पायजामा, नेवी ब्लू रंग का कुर्ता और उसके ऊपर आसमानी नीले रंग की बंडी पहन रखी थी। पूरे परिधान का रंग संयोजन संतुलित और सुरुचिपूर्ण नजर आया। साफे के अंतिम छोर पर हरे और पीले रंग का मिश्रण भी दिखाई दिया, जिसने इसकी पारंपरिक छटा को और निखार दिया।

प्रधानमंत्री अपने पहले कार्यकाल से ही गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर अपनी वेशभूषा के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विविधता को रेखांकित करते रहे हैं। हर वर्ष उनका साफा न केवल फैशन का विषय बनता है, बल्कि उसके पीछे छिपी क्षेत्रीय कला, परंपरा और हस्तशिल्प की कहानी भी लोगों का ध्यान आकर्षित करती है।

इससे पहले, 76वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने सफेद कुर्ता-पायजामा के साथ गहरे भूरे रंग का बंद गले का कोट और लाल-पीले रंग का साफा पहना था। 75वें गणतंत्र दिवस पर उन्होंने बहुरंगी ‘बांधनी’ प्रिंट का साफा धारण किया था। बांधनी गुजरात और राजस्थान की प्रसिद्ध टाई-डाई कला है, जिसमें कपड़े को बांधकर रंगाई की जाती है और फिर हाथ से सुंदर डिजाइन उकेरे जाते हैं।

वर्ष 2023 में गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री ने कुर्ता और चूड़ीदार पायजामे के साथ बहुरंगी राजस्थानी साफा पहना था। उसी वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर भी उन्होंने कई रंगों वाला राजस्थानी शैली का साफा चुना, जिसका छेला कमर के नीचे तक लंबा था। 2019 में, प्रचंड बहुमत के साथ दूसरी बार सत्ता में लौटने के बाद, उन्होंने लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस भाषण के दौरान बहुरंगी साफा पहना था।

प्रधानमंत्री की पसंद में राजस्थानी साफा या पगड़ी विशेष स्थान रखती है। वर्ष 2014 में अपने पहले स्वतंत्रता दिवस भाषण में उन्होंने चमकीले लाल रंग का जोधपुरी बंधेज साफा पहना था। 2015 में बहुरंगी पीला लहरिया साफा और 2016 में गुलाबी व पीले रंग का टाई-एंड-डाई साफा उनकी वेशभूषा का हिस्सा रहा। 2018 में उन्होंने केसरिया साफा पहनकर राष्ट्र को संबोधित किया था।

गणतंत्र दिवस 2022 पर प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड की पारंपरिक टोपी पहनी थी, जिस पर ब्रह्मकमल बना हुआ था। ब्रह्मकमल उत्तराखंड का राजकीय फूल है। वहीं, 2021 में उन्होंने पीले बिंदुओं वाली ‘हालारी’ पगड़ी पहनी थी, जो जामनगर के शाही परिवार द्वारा उन्हें भेंट की गई थी।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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