D Raja CPI leader Statement: देश की राजनीति में मचे घमासान के बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी राजा ने एक बड़ा बयान दिया है। शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश के राजनीतिक हालात बहुत तेजी से बदल रहे हैं। जो क्षेत्रीय पार्टियां कभी कांग्रेस से अलग होकर बनी थीं, आज उनके सामने अपना स्वतंत्र अस्तित्व बचाए रखने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज है कि भविष्य में इन पार्टियों को वापस कांग्रेस में ही विलय करना पड़ सकता है।
एनसीपी के बाद अब टीएमसी में बिखराव-डी राजा
डी राजा ने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के उदाहरण देते हुए कहा, "शरद पवार (Sharad Pawar) और ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) कभी कांग्रेस के ही बड़े नेता थे। उन्होंने कांग्रेस से बाहर निकलकर क्रमशः एनसीपी (NCP) और टीएमसी (TMC) जैसी मजबूत पार्टियां बनाईं। लेकिन आज का राजनीतिक दौर ऐसा है कि इन दलों के लिए अकेले आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा है।"
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उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) में चल रही ताजा कलह का जिक्र करते हुए कहा कि पहले एनसीपी टूटी और अब टीएमसी के भीतर बड़ी बगावत हो चुकी है। टीएमसी के सांसदों का एक बड़ा गुट लोकसभा में अपने लिए अलग मान्यता की मांग कर रहा है। ऐसे हालात में इन क्षेत्रीय दलों का कांग्रेस के साथ वापस आना ही एकमात्र रास्ता बच सकता है।
मीनाक्षी नटराजन मामले पर भी बोले डी राजा
इसके अलावा, डी राजा ने कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन रद्द होने के मामले पर भी अपनी राय रखी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज किए जाने पर उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस को अपनी आगे की कानूनी रणनीति तय करनी होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि कांग्रेस के पास अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल जैसे दिग्गज वकीलों की फौज है, जिनकी मदद से वे चुनाव आयोग या हाईकोर्ट जा सकते हैं।
नामांकन रद्द होने पर बरसीं कांग्रेस नेता
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का पर्चा चुनाव अधिकारी ने एक पेंडिंग क्रिमिनल केस की जानकारी न देने के आधार पर खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद नटराजन ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पूरी तरह खत्म हो चुकी है और रिटर्निंग ऑफिसर के पक्षपातपूर्ण रवैये की पोल जनता के सामने खुल गई है। इस फैसले के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में 'सत्याग्रह' भी शुरू कर दिया है।
